Saturday, July 25, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- मेरा गांव

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
शीर्षक -"मेरा गांव"
विधा- छंदमुक्त कविता
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गांव की यादें बड़ी सुहानी 
ये  बातें  है   बड़ी   पुरानी 
गांव के घर में बड़ा सा आंगन
और आंगन में दादी की कहानी ।

वे  दिन सुहाने बचपन के 
जो बीते गांव के घर आँगन में 
एक सुकून भरा जीवन था 
कोई पराया नहीं सब अपना था ।

बहुत  सुंदर था मेरा गांव 
घर के करीब था पीपल का छांव
खूब खेला करती थी इसमें 
इसे पाने कुछ भी लगा लूं दांव ।

गांव की नदी में नहाना इतराना 
सहेली संघ पनघट पर जाना 
चाचा जी  के गन्नों के बरछा से 
गन्ना मांग- मांग कर के खाना ।

स्कूल जाते वक्त अमरुद चुराना 
और पकड़ लिए  जाने  पर 
माली काका से डंडे  खाना 
अच्छा लगता है पल याद करना ।

स्कूल से लौटते गोबर डंडा खेलना 
पेड़ पर चढ़ना ,बनिया पकड़ना 
पगडंडी  के  सहारे  खेतों  में 
दादा जी  को  खाना  पहुंचाना ।

छोटा  जरूर था  गांव यह  मेरा 
प्राकृतिक सौंदर्य से था पर  भरा 
जो भी आ जाता एक बार यहाँ
वादियों में यहां की डूब जाता सदा।

पर  समय   ने  करवट  लिया 
खनन  कोयला  का  यहाँ हुआ
कृषक का सब कुछ चला  गया 
शांति, सुकून,हरियाली सब खो गया ।

गांव का सब कुछ बदल गया
भद्दा रूप  इख़तियार  कर लिया
गांव छोड़  हमें भी जाना  पड़ा
गाँव को मुझे यादों में बसाना पड़ा।

एक आह्वान आज मुझे है करना
भले करना औधोगिकरण  तुम 
पर कोई गांव न उजाड़ करना 
मेरा गांव मुझे लौटा देना तुम ।

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