संबलपुर,जिला-कांकेर,
विषय :- गाँव से संबंधित
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~ ०•°• ० *मोर गाँव* ० •°•० ~
पीपर के छाँव मां,
नदिया के तीर मां,
सुग्घर पुरवैया बहिथे
मोर गाँव मां।
हरियर-हरियर धरती
महतारी के कोरा,
सुग्घर कपसा सरीख आसमां
लागे बाप के अगोरा।
नदिया अउ नरवा
गंगा बनगे,
देवता हा पांव पखारे
मोर गाँव मां।
बड़े-बड़े देवता
सुग्घर देवता विराजे,
सुरुज,चन्दा संग
तुलसी चौरा साजे।
रोज बिहनियां चरण झुकाथन
इहि धरती के कोर मां।
रग-रग मा मिहनत,अऊ
ईमान भरे मोर किसान के ।
लकर-लकर रेंगत रहिथे
होवत बिहान संग,
सोना अऊ रत्न उगलथे
संग अमरित धार बोहाथे
मोर गाँव मां ।
सुग्घर करम जगावव
मोर हिंदुस्थान मां,
जगर-मगर ज्योत
जलाबो देश महान मां।
पीपर के छाँव मां,
नदियाँ के तीर मां,
सुग्घर पुरवैया बहिथे
मोर गाँव मां।
*व्याख्या*-उपरोक्त कविता में गाँव का चित्रण किया गया है।गाँव की हरी-भरी धरती, यहाँ की बहती नदियाँ,देवी-देवता,पीपल की छाया आदि का वर्णन किया गया है।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
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