Saturday, July 25, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- गांव

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
        संबलपुर,जिला-कांकेर,
विषय :- गाँव से संबंधित
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 ~ ०•°• ०  *मोर गाँव* ० •°•० ~

पीपर के छाँव मां, 
नदिया के तीर मां,
सुग्घर पुरवैया बहिथे 
मोर गाँव मां।

हरियर-हरियर धरती 
महतारी के कोरा,
सुग्घर कपसा सरीख आसमां 
लागे बाप के अगोरा।

नदिया अउ नरवा
गंगा बनगे,
देवता हा पांव पखारे 
मोर गाँव मां।

बड़े-बड़े देवता 
सुग्घर देवता विराजे,
सुरुज,चन्दा संग 
तुलसी चौरा साजे।
रोज बिहनियां चरण झुकाथन
 इहि धरती के कोर मां।

रग-रग मा मिहनत,अऊ 
ईमान भरे मोर किसान के ।
लकर-लकर रेंगत रहिथे 
होवत बिहान संग,
सोना अऊ रत्न उगलथे 
संग अमरित धार बोहाथे 
मोर गाँव मां ।

सुग्घर करम जगावव 
मोर हिंदुस्थान मां,  
जगर-मगर ज्योत 
जलाबो देश महान मां।

पीपर के छाँव मां, 
नदियाँ के तीर मां,
सुग्घर पुरवैया बहिथे 
मोर गाँव मां।
*व्याख्या*-उपरोक्त कविता में गाँव का चित्रण किया गया है।गाँव की हरी-भरी धरती, यहाँ की बहती नदियाँ,देवी-देवता,पीपल की छाया आदि का वर्णन किया गया है।
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       नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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