महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक:"यादें मेरे गाँव की"
विधा-कविता
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देकर किलकारी खेले कूदे,
बचपन बीता जिस छाँव में।
रहता था जहाँ पर भाईचारा,
यादों की बारात मेरे गाँव में।।
लगता था जहाँ रोज शाम,
बरगद की छाँव पर चौपाल।
गाँव के मुखिया संग बैठकर,
सुलझाते थे झट सारे सवाल।।
मिल बाँटकर करते थे गुजारा,
सुख दुख का रखते थे ध्यान।
बड़े बुजुर्गो की समझाइश का,
सभी हमेशा करते थे सम्मान।।
खेत सजता था हल किसानों से,
गौठान की शोभा थी ग्वालिन।
मटके लेकर चलती थी सरपट,
पनघट की रौनक थी पनहारिन।।
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द्रोपती साहू "सरसिज"
महासमुन्द, छत्तीसगढ़
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