Monday, July 13, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार कृत आलेख- पर्यावरण और हरियाली पर्व

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   विधा - आलेख 
   शीर्षक  -  " पर्यावरण और हरियाली पर्व "
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भौतिक विकास के पीछे दौड़ रही दुनिया ने आज जरा ठहरकर सांस ली तो उसे अहसास हुआ कि चमक-धमक के फेर में क्या कीमत चुकाई जा रही है। आज ऐसा कोई देश नहीं है जो पर्यावरण संकट पर मंथन नहीं कर रहा हो। भारत भी चिंतित है। लेकिन, जहांं दूसरे देश भौतिक चकाचौंध के लिए अपना सबकुछ लुटा चुके हैं, वहीं भारत के पास आज भी बहुत कुछ बाकि है। पश्चिम के देशों ने प्रकृति को हद से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। पेड़ काटकर जंगल के कांक्रीट खड़े करते समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि इसके क्या गंभीर परिणाम होंगे? प्रकृति को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए पश्चिम में मजबूत परंपराएं भी नहीं थीं। प्रकृति संरक्षण का कोई संस्कार अखण्ड भारतभूमि को छोड़कर अन्यत्र देखने में नहीं आता है। जबकि सनातन परम्पराओं में प्रकृति संरक्षण के सूत्र मौजूद हैं।

घर में तुलसी का पौधा लगाने का आग्रह भी हिन्दू संस्कृति में क्यों है? यह आज सिद्ध हो गया है। तुलसी का पौधा मनुष्य को सबसे अधिक प्राणवायु ऑक्सीजन देता है। तुलसी के पौधे में अनेक औषधीय गुण भी मौजूद हैं। पीपल को देवता मानकर भी उसकी पूजा नियमित इसीलिए की जाती है क्योंकि वह भी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन देता है। परिवार की सामान्य गृहिणी भी अपने अबोध बच्चे को समझाती है कि रात में पेड़-पौधे को छूना नहीं चाहिए, वे सो जाते हैं, उन्हें परेशान करना ठीक बात नहीं।

 धान के कटोरा के नाम से मशहूर हमारे छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरूआत हरेली से होती है, इस दिन किसान खेती में उपयोग होने वाले सभी औजारों की पूजा करते हैं। गाय-बैलों की भी पूजा की जाती है। गेंड़ी सहित कई तरह के पारंपरिक खेल भी हरेली के आकर्षण होते हैं। 
हरेली तिहार में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचल में खेल-कूद का आयोजन किया जाता है। छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्टॉल लगाया जाता है
खेल-कूद स्पर्धाओं में पुरस्कार वितरण किया जाता है और  पौधारोपण को प्राथमिकता दी जाता है। इस अवसर पर गेड़ी दौड़ जैसी ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। 
        हरेली में जहां किसान कृषि उपकरणों की पूजा कर पकवानों का आनंद लेते हैं, वहीं युवा और बच्चे गेड़ी चढ़ने का मजा लेंगे। लिहाजा हरेली के दिन सुबह से ही घरों में गेड़ी बनाने का काम शुरू हो जाता है।

निष्कर्ष :--
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अंत में मैं इतना कहना चाहूंगा कि हमें पर्यावरण के प्रति बहुत ही सजग रहने की जरूरत है हमें इस मुद्दे पर विचार  ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए ताकि हम इस पर्यावरण को बचा सके। हमें अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधों का वृक्षारोपण करना चाहिए ताकि हमें भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना ना करना पड़े और हमें निरंतर शुध्द आक्सीजन की प्राप्ति होती रहे इसके लिए हमें एकजुट होकर सामने  आना होगा और सभी को इसके महत्व के प्रति जागरूक होना होगा तथा इसे अन्य लोगों तक भी पहुंचाना होगा ताकि और लोग भी जागरूक हो सकें और वृक्षारोपण के महत्व को समझ सके।

" वृक्ष लगाओ,भविष्य बचाओ "

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