1•रचनाकार-एच-एस-अरमो,अरमान।
2•जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
3•शीर्षक-""भूला रहे हम----""
4•विधा--छ्न्द मुक्त(कविता)
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=÷×¥""भूला रहे हम ---"""==×÷
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अपनी छत्तीसगढिया सँस्कृति को,
खान - पान ,रहन-सहन को,
भूला रहे हम---।
अपने तीज- त्यौहार ,
रीति-रिवाजों को भी,
भूला रहे हम ----।
अपनी बोली-भाषा,
जंगल,पहाड़ और तरिया को भी,
भूला रहे हम ----।
गाँव की माटी,
बचपन के साथी,
पत्तरी में खाना और बोरा-बासी को,
भूला रहे हम ----।
चूड़ी,फुन्दरा-लाछा को,
सुतिया-,माला,खिनवा,बहटा को,
लुगड़ा,धोती-कुर्ता और पटका को,
भूला रहे हम ----।
बनकर हम शहरीया,
गाँव का रहवासी,
कहलाता छत्तीसगढिया,
सब कहते,पिछड़ा व गँवईंया ।
हम,आने वाली पीढ़ी को,
क्या दे व सीखा पायेंगे,
अपनी बोली-भाषा और सँस्कृति को ।
क्या नहीं है,हमारी संस्कृति में,
प्रगति की चाल में,
अपनी छत्तीसगढिया पहचान को,
भूला रहे हम----।
आओ आज हम,संकल्प लें,
अपनी सँस्कृति और विरासत,
तीज-त्यौहार,खान-पान,रहन-सहन,
सबकी मर्यादा बचाने का प्रयास करें ।
~~~~~~~इति~~~~~~~~
**मौलिक प्रस्तुति-अरमो,रायपुर ।
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