Friday, July 17, 2020

रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना:- भूला रहे हम

1•रचनाकार-एच-एस-अरमो,अरमान।
2•जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
3•शीर्षक-""भूला रहे हम----""
4•विधा--छ्न्द मुक्त(कविता)
~•°•~~~~•°•~~•°•~~•°•~~

=÷×¥""भूला रहे हम ---"""==×÷
          ************
अपनी छत्तीसगढिया सँस्कृति को,
खान - पान ,रहन-सहन को,
भूला रहे हम---।

अपने तीज- त्यौहार ,
रीति-रिवाजों को भी,
भूला रहे हम ----।

अपनी बोली-भाषा,
जंगल,पहाड़ और तरिया को भी,
भूला रहे हम ----।

गाँव की माटी,
बचपन के साथी,
पत्तरी में खाना और बोरा-बासी को,
भूला रहे हम ----।

चूड़ी,फुन्दरा-लाछा को,
सुतिया-,माला,खिनवा,बहटा को,
लुगड़ा,धोती-कुर्ता और पटका को,
भूला रहे हम ----।

बनकर हम शहरीया,
गाँव का रहवासी,
कहलाता  छत्तीसगढिया,
सब कहते,पिछड़ा व गँवईंया ।

हम,आने वाली पीढ़ी को,
क्या दे व सीखा पायेंगे,
अपनी बोली-भाषा और सँस्कृति को ।

क्या नहीं है,हमारी संस्कृति में,
प्रगति की चाल में,
अपनी छत्तीसगढिया पहचान को,
भूला रहे हम----।

आओ आज हम,संकल्प लें,
अपनी सँस्कृति और विरासत,
तीज-त्यौहार,खान-पान,रहन-सहन,
सबकी मर्यादा बचाने का प्रयास करें ।
~~~~~~~इति~~~~~~~~
**मौलिक प्रस्तुति-अरमो,रायपुर ।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...