Friday, July 17, 2020

रायपुर से रजनी शर्मा बस्तरिया की रचना:- जंगल हो जाऊंगी

कवयित्री:- श्रीमती रजनी शर्मा बस्तरिया
जिला :- रायपुर छत्तीसगढ़
शीर्षक:- मैं जंगल हो जाऊंगी


मैं जंगल हो जाऊंगी.......

रोप दूंगी मैं एक पौधा,
और मैं  खुद ,
जंगल हो जाऊंगी........
जब मेरे गप्पे में होंगें,
महुआ, चार,कोदो,कुटकी
और मैं खुद,
जंगल में पसर जाऊंगी......
बीज बगरा कर चिक्खल में,
थरहे जब लहलहायेंगे,
और मैं खुद,
जंगल में उग जाऊंगी..........
हवाओं को रख "दोने"में,
भात पत्तल,पेज तुमा में,
और मैं खुद,
जंगल में पानी बन जाऊंगी......
सदियों बाद नाम पता,
जो कोई पूछे मेरा,
और मैं खुद,
जंगल में गुम हो जाऊंगी.........

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