Friday, July 17, 2020

रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की रचना:- संस्कृति का भण्डार छत्तीसगढ़

रचनाकार--जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विधा--कविता
शीर्षक--'संस्कृति का भण्डार छत्तीसगढ़'
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छत्तीसगढ़  राज्य   रहा , संस्कृति का भण्डार ।
लोग    मनाते    रहे   हैं , कई   तीज - त्यौहार ।।१।।
रामनवमी-अक्ति सहित , फिर  रथयात्रा जान ।
हरेली     -    नागपंचमी , राखी   का  सम्मान ।।२।।
हलषष्ठी   -   जन्माष्टमी , पोला  -  तीजा पर्व ।
जन्म गणेश पाख पितर , नवरात्र   रखें   सर्व ।।३।।
शरद    पूर्णिमा   मनाते , बाँटे  -  खायें  खीर ।
पुण्य   तीर्थ   में   नहाते , धोते   पाप   गभीर ।।४।।
धनतेरस   -   दीपावली , करें   सब  दीपदान ।
करें    गोवर्धन  -   पूजा , रखें कृष्ण का  मान ।।५।।
देवोत्थान       एकादश , मनाते  भक्ति- भाव ।
आँवला  पूजा  में   सब , दिखलाते  समभाव ।।६।।
अगहन  मास  में  आये , जितने  भी  गुरुवार ।
महिला वर्ग  लक्ष्मी  को , पूजतीं  बार  -  बार ।।७।।
मकरसंक्रान्ति     मनाते , करें  तीर्थ  में  स्नान ।
वस्त्र-गुड़-सोना-कम्बल , करते  हैं  तिल-दान ।।८।।
छेरछेरा      पूनम    को , घर - घर  माँगें  धान ।
शाकम्भरी   माता    का , जन्मवार  यह जान ।।९।।
माघ  शुक्ल  पंचमी को , आता   पर्व   बसन्त ।
वीणापाणी   जन्म   लीं , देतीं    ज्ञान   अनंत ।।१०।।
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी , शिवरात्रि सुखद वार ।
पूजा-भजन  भक्त  करें , शंभु को  कर  पुकार ।।११।।
होलिका-दहन भी सदा , आती  फाल्गुन मास ।
सभी के  मन में 'ठाकुर', भरती  अति उल्लास ।।१२।।
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व्याख्या--छत्तीसगढ़ के बारह महीने में आनेवाले 
             अनेक व्रत-त्यौहार-पर्वपर्वाणी का यहाँ
              वर्णन करने का प्रयास किया गया है ।

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