Thursday, July 30, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- ज्ञान

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर
   शीर्षक - *ज्ञान*
   
           *ज्ञान*

ज्ञान की धरा,
        है विश्व- गुरु बना,
भारत का स्वर्णिम
        इतिहास है घना।

विश्वामित्र, वशिष्ठ, 
       संदीपनि, चाणक्य के
 ज्ञान से जलती रही 
             अमर ज्योति।

वेदना को जब ज्ञान
            मिले अंतरात्मा का,
निराशा आशा में बदल 
          जाती है,जब मिलता
 ज्ञान का मोती।

अज्ञानता का अंधकार 
        दूर हो जाता,
जब जीवन में स्वर्णिम
        ज्ञान की आभा होती।

दुनियाँ रंग-रंगीली है,
        संभल जाओ,
कुरीतियों को दूर कर 
         जन-जन को जगाओ 
जो हरदम सोती।

जग में ज्ञान का 
        परचम फैलाएं, 
सब ज्ञान प्राप्त करें 
        ये नहीं किसी की बपौती।

ज्ञान की धरा,
         विश्वगुरु है बना,
भारत का स्वर्णिम
          इतिहास है घना।

*व्याख्या*-उपरोक्त कविता में ज्ञान के महत्व एवं देश के स्वर्णिम इतिहास को बताया गया है।
-------------------------
    नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...