Saturday, July 18, 2020

महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की रचना:- हरेली तिहार

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
विषय :- हरेली तिहार
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लहरावत है धान - चाऊर,
आइस खेत खार म बहार।
चेहरा म खुशी लावय भैया,
हवय ये हरेली के तिहार।
            जोत डारेन डोली खेत,
            उतर गे बोआई के भार।
            गुरहा चिला के रोटी खवाय बर,
             हवय ये हरेली के तिहार।
जमके बरसे सावन के बरसा,
बोहावत हवय पानी के धार।
लाए गेरी डांग के शौक मन म,
हवय ये हरेली के तिहार।
               महकत हे अंगना के फुलवारी,
               फुलत फरत हे साग डार।
               छोट मोट पार्टी करें के,
               हवय ये हरेली के तिहार।
अवांस के दिन ये रे भैया,
होही टोना टोटका भरमार।
बिखर्रा टोनही शक्ति पाथे,
हवय ये हरेली के तिहार।
               दीदी खेलय फुगड़ी, ददा खेलय गेरी,
                मगर नदावय खेला, खोल दुआर।
                नरिहर कुकरी बलि चढा़वत,
                 हवय ये हरेली के तिहार।

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व्याख्या:- उपरोक्त रचना में रचनाकार ने छत्तीसगढ़ के वर्ष के पहले त्यौहार माने जाने वाले हरेली त्यौहार की सुन्दरता को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

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