संबलपुर,जिला-कांकेर
विषय.:- छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पृष्टभूमि से संबंधित
शीर्षक :- *महर-महर महकथ हे*
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*महर-महर महकथ हे*
महर-महर महकथ हे
मोर छत्तीसगढ़ के माटी,
चन्दन वन अइसन लागत हे
गाँव -गली अउ घाटी।
छत्तीसगढ़ के गुरतुर भाखा,
सबला परेम पिरित मां बान्धे हे।
सबके मन ला भावत हे संगी,
सबके मान बढ़ावत हे.....
बड़ सुग्घर इहाँ के
गाँव-गली खार,
हरेली,तीजा, पोरा
इहाँ के तीज-तिहार।
सुआ,करमा, ददरिया
इहाँ के सुग्घर गान,
किसिम-किसिम के
नाचा इहाँ के शान....
सबो धरम के मनखे
इहाँ के सनतान,
सबो धरम के मैन बढाबो,
सबके जय-जयकार।
इहाँ के धरती मां
किसिम-किसिम के खदान,
हीरा,लोहा,वनोपज
इहाँ के पहिचान।
महर-महर महके
छत्तीसगढ़ इही सपना हे,
सबो मनखे
मिर जुर के रहय
इही हमर कहना हे....
महर-महर महकथ हे
मोर छत्तीसगढ़ के माटी,
चन्दन वन अइसन लागत हे
गाँव-गली अउ घाटी।
व्याख्या :- उपरोक्त कविता में छत्तीसगढ़
की सांस्कृतिक विशेषताओं का वर्णन
किया गया है।यहाँ की बोली,तीज,त्योंहार, नृत्य,गान, एवं खदान का वर्णन है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
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