Friday, July 17, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना:- महर-महर महकथ हे

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
         संबलपुर,जिला-कांकेर
विषय.:- छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पृष्टभूमि से संबंधित
शीर्षक :- *महर-महर महकथ हे*
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   *महर-महर महकथ हे*

महर-महर महकथ हे 
मोर छत्तीसगढ़ के माटी,
चन्दन वन अइसन लागत हे 
गाँव -गली   अउ घाटी।

छत्तीसगढ़ के गुरतुर भाखा,
सबला परेम पिरित मां बान्धे हे।
सबके मन ला भावत हे संगी,
सबके मान बढ़ावत हे.....

बड़ सुग्घर इहाँ के 
गाँव-गली खार,
हरेली,तीजा, पोरा 
इहाँ के तीज-तिहार।

सुआ,करमा, ददरिया 
इहाँ के सुग्घर गान,
किसिम-किसिम के
नाचा इहाँ के शान....

सबो धरम के मनखे 
इहाँ के सनतान,
सबो धरम के मैन बढाबो,
सबके जय-जयकार।

इहाँ के धरती मां
 किसिम-किसिम के खदान,
हीरा,लोहा,वनोपज 
इहाँ के पहिचान।

महर-महर महके 
छत्तीसगढ़ इही सपना हे,
सबो मनखे 
मिर जुर के रहय 
इही हमर कहना हे....

महर-महर महकथ हे 
मोर छत्तीसगढ़ के माटी,
चन्दन वन अइसन लागत हे 
गाँव-गली अउ घाटी।

व्याख्या :- उपरोक्त कविता में छत्तीसगढ़ 
की सांस्कृतिक विशेषताओं का वर्णन 
किया गया है।यहाँ की बोली,तीज,त्योंहार, नृत्य,गान, एवं खदान का वर्णन है।

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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