स्थान- बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- सायली
शीर्षक - "नद्या तट"
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सभ्यता
की गवाह
बनती रही है
तटिनी तट
सदा
गंगा
गोदावरी कावेरी
कृष्णा हो या
सिंधु सतलज
नर्मदा
हरीतिमा
सा फैलाये
पावन धारा बहाये
धरा पर
नद्या
जल
की अथाह
उफान लिए बहे
नद्या यदा
कदा
उदगम
से उदगार
जलधि से मिलती
लिए हुए
उन्माद
अब्धि
की उपलब्धि
नद वाहिनि से
वर्ना कहाँ
जलधि
lovely meaningfull lines
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