जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता(प्रेमचंद पर आधारित)
शीर्षक --- शत शत वंदन प्रेमचंद को
व्याख्या ---कवि के द्वारा साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी के जन्म से लेकर शिक्षा कृतियों कठिनाईयों एवं उनकी लेखन की भाषा प्रकृति में विलीन होने तक की बातों का संक्षिप्त वर्णन किया गया है ।
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शत शत वंदन प्रेमचंद को
मां भारती के इस कलमकार को,
गिरधारी का शत--- शत वंदन ।
साहित्य के इस महा सूरज का,
नित ---नित करुं मैं अभिनंदन ।
हिंदी और उर्दू का बेटा,
प्रेमचंद इक नाम ।
जिनके लेखन का सूरज उगा,
आया न फिर कभी शाम ।
शहर बनारस गांव लमही,
धनपत राय का जन्म हुआ ।
आठ वर्ष में मां चल बसी ,
सोलह वर्ष पिता अन्त हुआ ।
मैट्रिक तक पढ़ाई इनकी,
स्कूल नंगे पांव जाते थे ।
गरीबी में फिर छूटी पढ़ाई,
पांच रुपए ट्यूशन से कमाते थे ।
साहित्य में अपार रुचि इनकी,
गरीबी अभाव शोषण में भी बनी रही ।
उपन्यास नित पढ़ने की आदत,
दीवानों जैसी जमी रही ।
सरुर मोलमा वार,
रतननाथ सरशार ।
उर्दू शायरों की पढ़ी उपन्यास,
हुआ तेरह वर्ष लेखन उद्गार ।
सादा सरल जीवन के धनी,
सदा मस्त ही रहते थे ।
सरलता सौजन्यता और उदारता,
की मूर्ति वह लगते थे ।
नाटक कहानी उपन्यास लिखे,
इनकी रचना में इतिहास बोलता था ।
वास्तविक भूमि पर इन्होंने लिखे,
जिसे पढ़कर खून खौलता था ।
भाषा इनकी अंग्रेजी ,उर्दू, फारसी,
सटीक सार्थक व्यंजना पूर्ण प्रयोग किए ।
उपमा,रुपक, उत्प्रेक्षा से,
साहित्य में रचना भर दिए ।
पन्द्रह उपन्यास तीन सौ कहानियां,
तीन नाटक दस अनुवाद किए।
सात बाल पुस्तकें हजारों लेख,
सम्पादकीय भाषण में देखिए ।
आठ अक्टूबर उन्नीस सौ छत्तीस,
इनका अंतिम दिन हुआ ।
उपन्यास के महा सम्राट का,
जीवन प्रकृति में विलीन हुआ ।
गिरधारी लाल चौहान
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