Thursday, July 23, 2020

रायपुर से रजनी शर्मा बस्तरिया की रचना:- मौसमों का सफर

रचनाकार     श्रीमती रजनी शर्मा बस्तरिया
शीर्षक      मौसमों का सफर
जिला।       रायपुर छत्तीसगढ़
विधा           मुक्त छंद



मौसमों का सफर
..

बड़े अरसे के बाद आज,
शहर में बत्ती गुल है ।
हाहाकार मच गया है.........
दूर गांव की मुंडेर पर,
ऊंघ रही चिरैया,
कोठार में अलसाये बैल.......
दरवाजे आपस में भिड़े हैं,
मसहरी पर पसरा सन्नाटा है,
पीपल तौल तौल कर,
हवा बांच रहा है..........
तालाब की लहरें असकटाती,
अपनी ही लहरें,
नाप रही हैं .............   
सालों से एक ही स्टेशन पर बजता,
भूली बिसरी सी गीतों की लहरी,
कनसुरी कर जाता है.........
गांवों में भरी दोपहरी,
अधपके सपनों के साथ,
तालाब की मेड़ पर,
पीपल के नीचे,
कट  ही जाती है,
सारे मौसमों का सफर।
बत्ती के गुल होने पर भी........

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