Thursday, July 23, 2020

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि " की रचना:- जीवन का सफर

 रचनाकार _ सावित्री यादव "सावि "
 
              बिलासपुर  छ.  ग. 
              विधा _ छंद मुक्त कविता


              शीर्षक _ जीवन का सफर 
 
जिंदगी का सफर हो या जीवन के, 
किसी एक दिन का सफर हो |
कुछ ना कुछ छुट्ट ही जाता है |

बस यादो में कुछ बातो में उस पल |
की खुशबु रहती है | उम्र  भर |

फिर चाहकर भी वो पल दुबारा नहीं आता |
हाँ उस पल की बाते जिंदगी भर  मन को है |भाता |

सफर ऐसा है | जीवन का हर पल कुछ सीखकर |
कुछ लेकर, कुछ देकर, कुछ  खोकर , कुछ पाकर |
जीना सीखता है |

जीवन  दुख_ सुख की ही पूरी कड़ी  है |
किसी का दुख बढ़ा किसी का छोटा है |
दस्तूर  है |ये जीवन का पल में पल बदल जाता है |

ये जीवन ऐसा जीयो की यहाँ  रहने नहीं घूमने आये है |
जाना है |इस दुनिया से ये सदा ध्यान रहे | 
सबके लिये मन  में करुणा और मान रहे |

सफर सार्थक हो इसलिए सदा ईश्वर का ध्यान रहे |
एक दिन उस परमात्मा में मिल जाना ये ज्ञान रहे |

भावार्थ _जीवन  के सफर की सच्चाई 

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