जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक --- गांव मेरा
व्याख्या ---कवि के द्वारा अपने गांव को आकर देखने एवं अपने गांव जैसे गांव में विकास करने एवं रहने की बात कही गई है । गांव से ही सब का विकास संभव है गांव देश का आधार है गांव में आधुनिक समस्त सुविधाओ का विस्तार होना चाहिए । जिससे गांव स्वावलम्बी बन सके और ग्रामीण लोगों का जीवन जो कृषि पर आधारित है सुखमय लग सके ।
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गांव मेरा
आकर देखो गांव मेरा, पाओगे न ऐसे।
महानदी की निर्मल धारा ,बहती गंगा जैसे ।
बरगद, पीपल, आम ,नीम,लगे हुए सघन ।
जिस पेड़ के नीचे बैठो,लगे तुम्हें मधूबन ।
खेतों में लगी है फसलें,धान ,ज्वार, मक्का ।
जिसकी आमदनी से , जीवन चलता सबका ।
युवा- युवती मेहनत करते,बाल वृद्ध घर में रहते ।
खेती की जरुरत हल-बैल, घर घर में सब रखते ।
हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,इसाई,न कोई यहां पर बात ।
घर आंगन गली खेत देखो, जीवन बितते साथ ।
कर्मा ,ददरिया ,पंथी ,शुवा, यहां का परम प्रिय गीत ।
जुम्मन और अलगू की तरह , यहां बने सब मीत ।
खेती यहां की मथुरा, काशी, मानते वेद और पुराण ।
इसकी सेवा चलता जीवन,सबका करते कल्याण ।
यहां जन्म पाकर मैं सच में, अपने आप पर इतराता हूं ।
छत्तीसगढ़ महतारी सेवा में ही, जीवन अपना बिताता हूं ।
ऐसा गांव सभी का बने, मेरे मन का हर पल सोच है ।
श्रम से सब कुछ होता,श्रम बिन सारी मिलता दोष है ।
गांव स्वर्ग से कम नहीं होता,अगर बनाना चाह हो ।
कदम कदम पर सुख मिलेंगे, बना लिए अगर राह हो ।
गिरधारी लाल चौहान
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