Saturday, July 25, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- गांव मेरा

 नाम----गिरधारी लाल चौहान
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता 
शीर्षक --- गांव मेरा
व्याख्या ---कवि के द्वारा  अपने गांव को आकर देखने एवं अपने गांव जैसे गांव में विकास करने एवं रहने की बात कही गई है । गांव से ही सब का विकास संभव है गांव देश का आधार है गांव में आधुनिक समस्त सुविधाओ का विस्तार होना चाहिए । जिससे गांव स्वावलम्बी बन सके और ग्रामीण लोगों का जीवन जो कृषि पर आधारित है सुखमय लग सके ।
************************************************
                  गांव मेरा
आकर देखो गांव मेरा, पाओगे न ऐसे।
महानदी की निर्मल धारा ,बहती गंगा जैसे ।

बरगद, पीपल, आम ,नीम,लगे हुए  सघन ।
जिस पेड़ के नीचे बैठो,लगे तुम्हें मधूबन ।

खेतों में लगी है फसलें,धान ,ज्वार, मक्का ।
जिसकी आमदनी से , जीवन चलता सबका ।

युवा- युवती मेहनत करते,बाल वृद्ध घर में रहते ।
खेती की जरुरत हल-बैल, घर घर में सब रखते ।

हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,इसाई,न कोई यहां पर बात ।
घर आंगन गली खेत देखो, जीवन बितते साथ ।

कर्मा ,ददरिया ,पंथी ,शुवा, यहां का परम प्रिय गीत ।
जुम्मन और अलगू की तरह , यहां बने सब मीत ।

खेती यहां की मथुरा, काशी, मानते वेद और पुराण ।
इसकी सेवा चलता जीवन,सबका करते  कल्याण ।

यहां जन्म पाकर मैं सच में, अपने आप पर इतराता हूं ।
छत्तीसगढ़ महतारी सेवा में ही, जीवन अपना बिताता हूं ।

ऐसा गांव सभी का बने, मेरे मन का हर पल सोच है ।
श्रम से सब कुछ होता,श्रम बिन सारी मिलता दोष है ।

गांव स्वर्ग से कम नहीं होता,अगर बनाना  चाह हो ।
कदम कदम पर सुख मिलेंगे, बना लिए अगर राह हो ।

गिरधारी लाल चौहान

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...