रचनाकार का नाम गोमती सिंह
जिला- कोरबा छत्तीसगढ़
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक--" सलाह "
कुएं में यादों की ,
जगत में बैठ कर
क्यों फेंक देते हो कंकड़,
अपने अंत:मन पर ।
फिर दृष्टि पटल पर छा जाती है यादों की लड़ियाँ ।
इन लड़ियों को छेड़ा न करो ये लगा देती है जीवन में हथकड़ियाँ ।
इसलिए--
कुएं में जीवन की जगत में बैठ कर,
खेला करो जीवन की लहरों को हांथो से छेड़ कर ।
क्योंकि--
जिंदगी जो गुजर जाती है ; नही आती है लौटकर ।
कुएं में यादोँ की जगत में बैठ कर ......अंतःमन पर।
।।इति।।
ब्याख्या-- उपरोक्त कविता में रचनाकार ये कहना चाह रही है कि भूतकाल को छोड़कर वर्तमान में रहना चाहिए ।
गोमती सिंह
Bahut Sundar
ReplyDeleteNice Lines
ReplyDeleteUttm rchna hai
ReplyDeleteबेहद खूबसूरत...
ReplyDeleteगहरा अर्थ ली हुई सुंडी कविता
ReplyDeleteबहुत सुन्दर कविता, यादें हमारे जीवन की कुंजी है,इसे सम्हालकर हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए
ReplyDeleteNice lines Great going
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