Wednesday, July 22, 2020

कोरबा से गोमती सिंह की कविता:-सलाह

रचनाकार का नाम गोमती सिंह 
जिला- कोरबा छत्तीसगढ़ 
विधा - छंद मुक्त कविता 
शीर्षक--" सलाह " 
कुएं में यादों की ,
जगत में बैठ कर 
क्यों फेंक देते हो कंकड़, 
अपने अंत:मन पर ।
फिर दृष्टि पटल पर छा जाती है यादों की लड़ियाँ ।
इन लड़ियों को छेड़ा न करो ये लगा देती है जीवन में हथकड़ियाँ ।
इसलिए--
कुएं में जीवन की जगत में बैठ कर, 
खेला करो जीवन की लहरों को हांथो से छेड़ कर ।
क्योंकि--
जिंदगी जो गुजर जाती है ; नही आती है लौटकर ।
कुएं में यादोँ की जगत में बैठ कर ......अंतःमन पर।
            ।।इति।।
ब्याख्या-- उपरोक्त कविता में रचनाकार ये कहना चाह रही है कि भूतकाल को छोड़कर वर्तमान में रहना चाहिए ।
         गोमती सिंह 
कोरबा छत्तीसगढ़

7 comments:

  1. बेहद खूबसूरत...

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  2. गहरा अर्थ ली हुई सुंडी कविता

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  3. बहुत सुन्दर कविता, यादें हमारे जीवन की कुंजी है,इसे सम्हालकर हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए

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