दिनांक _21-7-020
दिन -मंगलवार
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
विधा _छंद मुक्त कविता
शीर्षक _मन की कामना
ऐ रात टूटे सपनो को जोड़ने है |
ख़ुशी के कुछ पल दे जा |
जाग रहे है आशा मे,
नींद लाकर रात के ख्वाब दे जा |
जिंदगी थक सी गईं है |
कुछ अब आराम देदे |
अपने हिस्से मे भी ख़ुशी हो |
ऐसा कुछ पल देदे |
मीठी सी नींद आये |
अब चैन सकून मिले |
हमें भी हक है| मुस्कुराने का |
होठो को एक मुस्कुराहट देदे |
सबको तो बहुत कुछ दिया है |
मुझे भी कुछ देता जा जो ,
आस टूट गईं जीने की उसमे,
कुछ रंग भरता जा अपने,
हिस्से की जिंदगी मैं भी जी लूँ |
वो नई उम्मीद देता जा |
ये रात टूटे सपनो को जोड़ना है |
ख़ुशी के कुछ पल दे जा |
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
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