नाम----गिरधारी लाल चौहान
स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक ---चांद पर मेरा सुंदर घर
चाँद पर मेरा सुंदर घर ,और उसका प्रवेश मूहर्त ।
आपको लिखूं मैं आमंत्रण, आएंगे आप सशर्त ।
अकेले नहीं आना है, परिवार भी अपना लाना है ।
मेरा वर्षों का सपना,सबको एक साथ सुनाना है ।
घर बनाना कितना कठिन था, मैंने सरल बना दिया ।
जो कहते हैं कठिन कठिन,उनको मजा चखा दिया ।
समझो मेरी तपस्या है यह ,आपके आशीष से पूरा हुआ ।
लोग धरती पर घर बनाते, मेरा चांद पर जानो पूरा हुआ ।
डर रहा था मैं कहीं,यह अधूरा ही न रह जाए ।
देखा हुआ मेरा स्वप्न,कोरा रहकर न ढह जाए ।
सब अपनों को भेजा आमंत्रण,आप भी मेरे अपने हैं ।
कुछ पल के लिए ही सही, आपको चरण रखना है ।
यज्ञ हवन खाने पीने,सबका है यहां इंतजाम ।
आपकी तरह मित्र मेरे, मिलना रहेंगे तमाम ।
धरती पर है मित्रों की कमी,परन्तु चाँद पर है ढ़ेर ।
यहां न कोई रंजिश वंजिश, लड़ाई झगड़ा न हेर फेर ।
और ज्यादा क्या लिखूं,आप तो खुद समझदार है ।
इतनी सारी बात लिखा है ये सब आपका प्यार है ।
आएंगे आप जरुर ही ,आपका इंतजार रहेगा ।
मैं समझूंगा नहीं आए,तो समझिए बेकार रहेगा ।
गिरधारी लाल चौहान
व्याख्याता
व्याख्या ---कवि के द्वारा चांद पर अपना घर बनाना घर में प्रवेश हेतु अपने मित्र को आमंत्रण करना एवं घर बनाने में आने वाली समस्याओं का वर्णन किया गया है ।
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