Tuesday, July 21, 2020

जांजगीर चाम्पा से गिरधारी लाल चौहान की कविता:-चाँद पर मेरा सुन्दर घर

नाम----गिरधारी लाल चौहान
स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक ---चांद पर मेरा सुंदर घर

चाँद पर मेरा सुंदर घर ,और उसका प्रवेश मूहर्त  ।
आपको लिखूं मैं आमंत्रण, आएंगे आप सशर्त  ।

अकेले नहीं आना है, परिवार भी अपना लाना है ।
मेरा वर्षों का सपना,सबको एक साथ सुनाना है ।

घर बनाना कितना कठिन था, मैंने सरल बना दिया ।
जो कहते हैं कठिन कठिन,उनको मजा चखा दिया ।

समझो मेरी तपस्या है यह ,आपके आशीष से पूरा हुआ ।
लोग धरती पर घर बनाते, मेरा चांद  पर जानो पूरा हुआ ।

डर रहा था मैं कहीं,यह अधूरा ही न रह जाए ।
देखा हुआ मेरा स्वप्न,कोरा रहकर न ढह जाए ।

सब अपनों को भेजा आमंत्रण,आप भी मेरे अपने हैं ।
कुछ पल के लिए ही सही, आपको  चरण रखना है  ।

यज्ञ हवन खाने पीने,सबका है यहां इंतजाम ।
आपकी तरह मित्र मेरे, मिलना रहेंगे तमाम ।

धरती पर है मित्रों की कमी,परन्तु चाँद पर है ढ़ेर ।
यहां न कोई रंजिश वंजिश, लड़ाई झगड़ा न हेर फेर ।

और ज्यादा क्या लिखूं,आप तो खुद समझदार है ।
इतनी सारी बात लिखा है ये सब आपका प्यार है ।

आएंगे आप जरुर  ही ,आपका इंतजार रहेगा ।
मैं समझूंगा नहीं आए,तो समझिए बेकार रहेगा ।

गिरधारी लाल चौहान
    व्याख्याता

व्याख्या ---कवि के द्वारा  चांद पर अपना घर बनाना घर में प्रवेश हेतु अपने मित्र को आमंत्रण करना एवं घर बनाने में आने वाली समस्याओं का वर्णन किया गया है ।

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