जिला- बेमेतरा छ ग
विधा- कविता
शीर्षक -कोरोना और बेरोज़गारी
कोरोना महामारी बनकर काल,
छाया हुआ है पूरे विश्व पर।
उपर से बेरोज़गारी पर,
और भी हावी हुआ है ये।
खाने कमाने गए मजदूर बेकाम होकर,
हो गए मजबुर वापस आने को।
आए भी है जिस तरह,
नहीं सोचेंगे जाने के बारे में।
याद रहेगा हमेशा जहन में उनकी,
कोरोना का यह काल।
और कभी भी नहीं भूलेंगे,
यह बेरोज़गारी की मार।
तीर्थ और दर्शनीय स्थल,
सब बन्द पड़े हैं।
सुना पड़ा है,
सारा दरबार।
वहां दुकान चलाने वालों का,
हो गया हाल बेहाल।
कोरोना के कारण हर देश में,
है छाया आर्थिक संकट।
हर कारोबारी लगा हुआ है,
मजदूरों की छटनी करने में।
बेरोज़गारी क्या पहले कम थी,
कोराना ने और बढ़ा दी।
कोरोना का हाहाकार,
सारे मजदूर वर्ग को बैकाम बनाया.....
सूर्य प्रकाश पाटिल
बहुत सुन्दर लेख
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteसुन्दर रचना
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