कवयित्री: डॉ बी निर्मला, "राजी"
जिला: मैसूर,
राज्य: कर्नाटक,
शीर्षक: एक साहित्य सितारा - मुंशी प्रेमचंद
एक साहित्य सितारा - मुंशी प्रेमचंद
आकाश की शोभा हैं सूरज और चांद,
हिंदी साहित्य के सूर्य मुंशी प्रेमचंद,
लमही ग्राम में इनका था नाम हुआ,
जिसने हिंदी साहित्य को विश्व में महकाया।
जाने जाते वे मूल नाम धनपतराय से,
'उर्दू में'लिखते नवाब राय नाम से
कलम के महाधनी थे मुंशी प्रेमचंद,
भारतभूमि के हैं,वे अनमोल रतन।
हिंदी साहित्य,इनका विशाल और विराट,
कहलाते हिंदी साहित्य के उपन्यास सम्राट,
साहित्य भरा हुआ कहानियों, उपन्यासों से,
नवाजा उन्हें,' कलम के सिपाही' नाम से।
अपनी लेखनी से सबको विस्मित कर डाला,
कुछ न छूटा,सब विषयों पर लिख डाला।
निर्मला,कर्मभूमि,रंगभूमि,सेवासदन,
प्रेमाश्रम गबन,सर्वश्रेष्ठ उपन्यास गोदान,
सवा सेर गेहूं,पंच परमेश्वर, पूस की रात,
नमक का दारोगा,ठाकुर का कुआं,नशा,
बड़े घर की बेटी,बूढ़ी काकी, ईदगाह,
कफ़न आदि कहानियों के थे वे बादशाह।
आदर्श,यथार्थ,समाज सुधार, देशभक्ति,
भ्रष्टाचार,शोषण,झूठ,फरेब और गरीबी,
सबको जीवन में देखा,भोगा और जिया,
हिंदी साहित्य में,प्रेमचंद युग अमर हो गया,
इनकी प्रसिद्ध कहानियों का विश्व भर में,
हुआ अनुवाद देश विदेश की भाषाओं में,
ऐसा सितारा न फिर आएगा भारतभूमि पर,
नमन व प्रणाम उन्हें,गर्व है हमें प्रेमचंद पर।
डॉ.बी.निर्मला,
मैसूर कर्नाटक।
No comments:
Post a Comment