Friday, July 24, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- संस्कार

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   शीर्षक  -  " संस्कार "
     विधा - छंदमुक्त  
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मानव जीवन का सर्वोत्तम उपहार। 
शिक्षा से पहले मिले संस्कार।। 
भौतिकता में डूबा पूरा संसार। 
आध्यात्मिकता का करो प्रसार।। 

ऋषि मुनियों की जन्मभूमि भारत,
संस्कृति ही इसकी पहचान है। 
पश्चिमी हवाओं में बह मत जाना, 
संस्कार ही तेरा सम्मान है।। 
न करो कभी गलत व्यवहार। 
मानवता का यही आधार।। 

दादा-दादी की कहानी बेगानी हो गई।
अब सब मोबाइल की दीवानी हो गई।। 
सुनते थे जो कान चंदा मामा किस्से, 
आज ईयरफोन की लुभानी हो गई।। 
बच्चों पर भी कभी आँख लो निहार। 
सही नहीं ज्यादा भी दुलार।। 

माता-पिता की सेवा कर लो, 
उनके चरण ही चारों धाम हैं। 
भगवान बन धरती पर आये, 
बारंबार उनको प्रणाम है।। 
महिमा इनकी बहुत अपार। 
कदमों में ही स्वर्ग का द्वार।।

बड़े-बुजुर्ग का आदर करना।
भावनाओं का उनका ध्यान रखना।
कोमल-सा दिल बच्चे जैसा, 
गुस्से में कभी कुछ बात न कहना।। 
जीवन के हर पहलू से, करके साक्षात्कार। 
दिया तुझे खुशियों का संसार।। 

गरीबों पर दया का भाव रखना। 
अवहेलना कभी उनकी न करना।।
प्यासे राहगीर का तू कभी, 
अवकात या जाति न पूछना।।
करना दया, धर्म और उपकार। 
संस्कार ही उसका श्रृंगार।। 

तो आओ हम प्रण करें, 
संस्कार पूर्ण जीवन जीने का। 
भौतिकता का परित्याग कर, 
आध्यात्मिकता का अमृत पीने का।। 
मन से निकाल दो दुर्गुण विचार। 
अपनाओ सब भारतीय संस्कार।। 
     
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2 comments:

  1. बहुत सुंदर तरीके के समझाया है मामा जी
    संस्कार ही मनुष्य का श्रृंगार है।

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