रायगढ़,छत्तीसगढ़
विषय-गाँव पर आधारित कविता
विधा-मुक्त छंद
शीर्षक-मेरे गाँव के बच्चे
भूखे-नंगे मगर मुस्कुराते
मेरे गाँव के बच्चे
उछलते -कूदते कभी न थकते
मेरे गाँव के बच्चे
सीधे-साधे दिल के सच्चे
मेरे गाँव के बच्चे
पतली-सँकरी पगडंडियों से स्कूल जाते
मेरे गाँव के बच्चे
किसी का आम तो किसी का अमरूद चुराते
मेरे गाँव के बच्चे
डबरे पर सूरज का बिंब देख ललचाते
मेरे गाँव के बच्चे
नन्हे-मुन्ने मासूम ,अक्ल के कच्चे
मेरे गाँव के बच्चे
दिन-भर गली का धूल उड़ाते
मेरे गाँव के बच्चे
शाम होते ही घरों को लौटते
मेरे गाँव के बच्चे
रोज रात दादी से किस्से सुनते
मेरे गाँव के बच्चे।
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