जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा----श्लेश अलंकार पर आधारित सृजन
शीर्षक -----पंडित सुंदर लाल शर्मा (छत्तीसगढ़ के गांधी)
व्याख्या--कवि के द्वारा श्लेश अलंकार के माध्यम से पंडित सुंदर लाल शर्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का वर्णन किया गया है ।
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पंडित सुंदर लाल शर्मा (छत्तीसगढ़ के गांधी)
गांधी अपने देश की, गांधी अपने राज्य की ।
ऐसे गांधी की जरूरत,आज भी है समाज की ।
देश के गांधी मोहनदास, राज्य के सुंदर लाल ।
सभी क्षेत्रों में दोनों के ,....एक से एक कमाल ।
अश्पृश्यता की लड़े लड़ाई,... विजय दोनों ने पाए।
आजादी की झण्डा लेकर,सबको आजाद दिलाएं ।
जन जन के मन में बसते, उनके नाम और काम ।
एक जीवन में कर गए......,सौ जीवन के काम ।
छत्तीसगढ़ी दान लीला,उनका छत्तीसगढ़ीकाव्य ।
चित्र मूर्ति नाट्य कला से जुड़ा था उनका भाग्य ।
कविता में उनकी रुचि,.….... लिखते पढ़ते छपते थे ।
नाट्य लिखते खेलते भी , जागरुकता आती कहते थे ।
चमसूर गांव में जन्म इनका माता देवमती पिता जयलाल।
कवि संगीतज्ञ सज्जनता ज्ञान से चमकता जिनका भाल ।
कहते बचपन से सबको, किताब पढ़ने की आदत हो ।
ईश्वर से क्यों किसी की दूरी ,सबसे उनका इबादत हो ।
सफलता उन्होंने पायी, सफलता के थे ही धनी ।
छत्तीसगढ़ है धान कटोरा,वो छत्तीसगढ़ के थे मणी ।
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