जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-मिनी माता
विधा-मुक्त छंद ( श्लेष अलंकार)
मीनाक्षी ही मिनी माता थी,
पहली महिला सांसद बनीं।
छग की बेशकीमती मोती थी,
सुवर्ण -सी चमक लिए नारी
जागरण की प्रतीक ज्योति थी।
असम में पली -बढ़ी पर छग की
मूल निवासी परिवार की बेटी थी,
असमिया, हिंदी, अंग्रेजी और
छत्तीसगढ़ी भाषा की ज्ञात्री थी।
सतनाम पंथ के अगमदास की,
जीवन संगिनी बन कर छग आई
बूढ़े बरगद को भी उसने दंगों से
मुंगेली में सच को न्याय दिलाई ।
उद्योगों में युवाओं को रोजगार,
शिक्षा का अलख जगाई थी,
तभी तो छग की चिंगारी बन,
मिनी माता वह कहलाई थी।
सुमन से चट्टान- सा दृढ़ संकल्प
बांगो परियोजना वह लाई थी,
भूल नहीं सकता है कोई उन्हें,
ऐसी ज्वाला वह धधकाई थी।
प्रथम सांसद छग की बन वह
एक इतिहास नया रचाई थी।
नमन करते हैं उस नारी को,
जो नारी शक्ति बन छाई थी।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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श्लेष अलंकार_
मोती-कीमती रत्न,महान हस्ती।
सुवर्ण- सुंदर चेहरा,सोना
बूढ़े बरगद-पुरानी परंपरा,थके हुए।
चिंगारी-ज्वाला ,प्रकाश की किरण।
सुमन-फूल, कोमल मन।
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