Tuesday, July 7, 2020

मुंगेली से नागेश कश्यप की रचना- नँदावत किसानी

रचनाकार का नाम:- नागेश कश्यप
जिले का नाम:- मुंगेली(छत्तीसगढ़) 
शीर्षक:- नँदावत किसानी
विधा:- कविता

नँदावत किसानी

देख तो संगी मोर छ.ग.के,
किसानी घलो नँदावत हे।
पुरखा के चिन्हा नाँगर बइला ,
कोनो कोनो मेर फँदावत हे।।

अरा ररा तता तता नँदागे,
नई हे अरई अऊ तुतारी जी।
नाँगर के मुठिया धरइया नँदागे,
नँदागे हाथ के बुवारी जी।।

हँसिया के लुवइया नँदागे,
नँदागे करपा के बँधइया जी।
सिला बिनइया लइका नँदागे,
नँदागे दऊरी के फँदइया जी।।

लइका पन के सुरता आथे,
मोर भर्री खेत वो दिन के।
लाड़ू मुर्रा खावन संगी।
घुम घुम सिला बिन के।।

धिरे धिरे गाड़ी बेलन नँदाथे,
अऊ नँदाथे पैरा के खोवइया।
आऊ कोन ल बताँव संगी,
नँदागे कोठार के सोवइया।।

अब के मनखे नवा नवा,
मशीनी जाल म छँदावत हे।
देख तो संगी मोर छ.ग.के,
किसानी घलो नँदावत हे।

            नागेश कश्यप।।

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