Monday, July 27, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- कलाम

कवयित्री-मीरा आर्ची चौहान
जिला- कांकेर,छग
शीर्षक-ऐपीजे अब्दुल कलाम
विधा-कविता ( मुक्त छंद)

वह पढ़ता रहा पुस्तक
चौदह भाई -बहनों के
 साथ हर दिन एक ही
रोटी खाकर भी उसने
गढ़ दिया नव इतिहास।

नमाज़ के साथ पढ़ी 
रामायण तब पुष्पक
 विमान कौतूहल का
 विषय रहा हमेशा 
आलोचक कहते रहे
मुस्लिम होकर  हिन्दू
ग्रंथ पढ़ते हो तब भी
वह चिंतन करता रहा।

बन गया मिशाइल मेन,
वैज्ञानिक,अग्नि के उड़ान
के लेखक, राष्ट्रपति ,
उनकी उत्कृष्ट सोंच
जागते हुए सपने देखो
और उसे पूरा करने में
सर्वस्व लगा दो।

आजीवन आलोचनाओं को
हथियार बना बढ़ते रहें
अग्निपथ पर  गरीबी
का दर्द जानते थे वे 
इसीलिए सारी कमाई 
न्यौछावर कर दिया
 देश  की प्रगति के लिए।

और कहा कि ऐसा कुछ 
करें या लिख जायें कि 
लोग मौत के बाद भी तुम्हें 
याद करे जमाना हरपल
आज नहीं है कलाम जी
किंतु उनके विचार सदैव
प्रेरित करते हैं आगे सिर्फ
आगे बढ़ते रहने को हमें।।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग
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