जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- छत्तीसगढिया मिठाई
विधा-कविता (मुक्त छंद)
सुनौ जम्मो संगी तिहार मनालव,
खावव ग सब छग के मिठाई।
गुलगुला भजिया, चीला अउ फरा,
अरसा,ठेठरी,खुरमी,उरीद के बरा
पपची,करी अउ अंगाकर रोटी,
देहरौरी,चौसेला,तसमई ,सोहारी
आनी -बानी के खाई - खजाना
मूर्रा लाडू,नड्डा गजब मिठाथे।
बड़े भउजी रांधथे गजब के रोटी,
छोटे देवर बाबू ह अब्बड खाथे।
तीजा-पोरा किसिम- किसिम के
रोटी-पीठा ल बनाबो ओ बिहिनी।
मिल जुल के हम नांचबो गाबो,
जम्मों तिहार ल सुग्घर मनाबो।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर ,छग
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शब्दार्थ-
ठेठरी-गोल आकृति वाला नमकीन।
तसमई-खीर
फरा-भाप में पका चांवल का व्यंजन
गुलगुला-गेहूं के आटे में गुड़ डालकर बनाया जाने वाला व्यंजन।
चीला-चांवल के आटे में नमक या गुड़ डालकर बनाया गया व्यंजन।
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