संबलपुर, जिला-कांकेर,
विधा-रेखा चित्र
शीर्षक-मेरा गाँव
*मेरा गाँव*
जिला मुख्यालय कांकेर के पश्चिम में प्राकृतिक दृश्यों को समेटे सड़क के दोनों ओर ऊँचे -ऊँंचे वृक्ष संग में कहीं छोटे-छोटे पहाड़ मानो राहों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते नजर आते हैं। कहीं-कहीं नभ पहाड़ों को छूने को आतुर प्रतीत होते हैं ।जिला मुख्यालय से लगभग पचपन किलोमीटर दूर में मेरा सुंदर सा गाँव संबलपुर है ।पुरानी और ऐतिहासिक बस्ती का खिताब लिए मेरा गाँव बड़ा प्यारा है।संबलपुर पहूँचने के चार किलोमीटर पहले राजा भानुप्रतापपुर देव द्वारा बसाया गया नगर भानुप्रतापपुर आज तहसील और ब्लाक मुख्यालय बन गया है। जल्द ही जिला का दर्जा प्राप्त करने का बाट जोह रहा है ।इसकी अपनी अलग पहचान है। भानुप्रतापपुर से संबलपुर आते समय सड़क के दोनों किनारे सरई के ऊँचे -ऊँचे वृक्ष ऐसे लगता है जैसे हर आने वाले लोगों का स्नेह भरी नजरों से अभिनंदन कर रहा हो। गाँव के चारों तरफ वनोपज का असीम सौन्दर्य का भंडार देवधारा नदी की उमड़ती बलखाती लहरें खण्डी घाटी में जाकर विस्तृत रूप लेकर मानो विश्राम करती है। गाँव के आसपास लौह अयस्क के खदान रेल्वे लाइन बिछ जाने के बाद और रुपहला हो उठा है। मेरे गाँव में सिद्ध गणेश जी की ऐतिहासिक मंदिर है जो कई किवदंतियों को समेटे हुए हैं ।पास में ही दंतेश्वरी के चार गढ़ में से एक गढ़ बांसला है ।जहाँ मां दंतेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर है ।वह स्थान अतीत में यह कंड रा राजाओं की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करता था।बड़ा ही प्यारा और मनोरम क्षेत्र है ।प्राची से झांकता रवि का मनमोहक दृश्य और ढलती शाम की अरुणिमा सबको बांधे रखता है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर, (छ .ग.)
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