जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - रेखाचित्र
शीर्षक - " रायगढ़ की बाढ़ "
ब्याख्या - इसमें लेखक ने उस मंजर का रेखाचित्र बनाने की कोशिश की है जहाँ शहर के एक मोहल्ले में तेज बारिश के कारण बिना नदी के ही बाढ़ आ जाती है।
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बरसात ऋतु चल रही थी। दिनभर बारिश हो रही थी और रात में भी बादल आराम करने के बजाय आपस में आलिंगन कर घोर गर्जना कर रहे थे। मानो ऐसा बोल रहे हैं कि जब हम आराम नहीं कर रहे तो तुम इंसान इतनी गहरी नींद में कैसे जा सकते हो। मैं कितने देर से तुमको जोर जोर से आवाज लगा रहा हूँ और तुम हो कि बस कुंभकर्ण बने शयन कक्ष में शहर की इस भयावह स्थिति से बिल्कुल अनजान बने हुए हो। मैंने तुमको अपनी डरावनी कड़क चमक से भी जगाना चाहा लेकिन पता नहीं तुम कौन से हसीन सपने में खोये हुए हो।
मैं उस समय अपने भाभी के यहाँ मेरे रूम से कुछ ही दूर में रात्रिभोज के लिए गया हुआ था। बारिश होने के कारण वही रुक गया था। टीवी देखते देखते कब आँख लग गई पता ही नहीं चला।
उनका घर थोड़ा समतल भाग से निचले तल में था और एक बड़ी गंदी पानी की नाली भी बीच में पड़ती थी।
मेरे अभी तक की सबसे बड़ी पूँजी मेरा मार्कशीट की फाइल भी भीग गई थी। ये सब मेरे दोस्तों ने मुझे फोन करके बताया। कुछ पल के लिए मैं तो एकदम स्तब्ध हो गया क्या हुआ, क्या हो रहा है ,कुछ समझ ही नहीं आया।
चूँकि मैं उस समय पाॅलिटेक्निक का छात्र था और अपने मित्रगण के साथ रूम किराये में रहता था। मैंने दोस्तों को बोला कि कृपया मेरे फाइल को संभाल कर रख दे ताकि उस फाइल की तरह कहीं मेरा भविष्य न डूब जाये।
कुछ वक्त के पश्चात मेरे श्रव्य इंद्री ने भी काम करना चालू किया।रात की उस शांत मंजर में बाहर से कोलाहल सुनाई दे रहा था। तब तक घर के बाकी लोग भी जग गये। दरवाज़ा खोला तो बाहर का दृश्य बहुत ही भयानक था। इतनी भारी बारिश हो रही थी कि मानो इंद्र देव जी सारा कसर आज ही निकाल देंगे।
धीरे-धीरे बारिश और तेज होने लगी मोहल्ले का निचला हिस्से के घर में पूरा घूस गया था।पूरा मोहल्ला जलमग्न हो चुका था।कई घर तो पूरी तरह से जल में समा गए थे चूंकि पूरे मोहल्ले में भैया लोगों का घर ही बहुमंजिला था और पक्का भी। इसलिए सभी जान की रक्षा के लिए हमारे यहाँ आ गये थे। कई बुजुर्ग आने में असमर्थ थे तो भैया ने उनको कमर तक की पानी में चलकर घर तक लाये।
ये सब नगर निगम की कार्यों का पोल खोल रही थी। क्योंकि पानी की निकासी के लिए कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।वरना बिना नदी का शहर में बाढ़ भला कैसे आ सकती है। पास में एक बड़ा सा तालाब भी था जिसके कारण जल स्तर और भी बढ़ गया था। फिर अचानक पानी घर में घूसने लगा सारा समान पानी में गोता खाने लगा। सोफा, अलमारी, फ्रीज सब पानी में तैर रहे थे। लेकिन जान के आगे उन सबका कोई मूल्य नहीं था।
सभी जान को बचाने के लिए दूसरी मंजिल जो कि निर्माणधीन स्थिति में थी, उसमें रात भर गुजारे। हम लोग लगभग 35 लोग थे जिसमें बच्चे बूढ़े सभी शामिल थे। सबकी जिंदगी अभी बीच मझधार में फंसी थी।सभी लोग बहुत डरे हुए थे कि कहीं जल का स्तर और बढ़ा तो क्या होगा। भगवान की कृपा से सुबह तक जल का स्तर थोड़ा कम हुआ और हम सब बाढ़ सहायता टीम की जाबाजों की बदौलत से सकुशल सुरक्षित जगह तक पहुँच पाये।
आज भी इस भयावह घटना की रेखाचित्र मेरे आँखों के सामने छप जाती है।
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Badhiya hai...
ReplyDelete🙏🙏 bhagwan ji last me SB thik kr dete hai
ReplyDeleteTrue story . I know that very well.
ReplyDeleteBest..
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