जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
शीर्षक - " ज़िन्दगी "
विधा - छंदमुक्त
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जिंदगी एक लंबी सफर है।
कहाँ तक जाना, न कुछ खबर है।
उम्मीद न रख तू किसी से,
दुनिया सिर्फ मतलबों का शहर है।
अकेला राहगीर तू ही, तेरी मंजिल का,
परछाई बस तेरा हमसफर है।
जिंदगी जीना कोई आसान काम नहीं,
कभी अमृत का प्याला, कभी सांपों का जहर है।
माना मुश्किलें है बहुत इस राह में,
चट्टानों को तरासती, नदी की एक लहर है।
जख्म-ए-निशान दिलों के भरते ही नहीं,
दर्द की खलिहान को सींचती, एक नहर है।
पत्थर भी पारस बन जाता सानिध्य में,
बस संगति-संगति का असर है।।
उलझनों से भरी पड़ी है ये जिंदगी,
सुख दुःख का संगम है ये जिंदगी,
कैसे बताऊँ ये कौन सा मंजर है।
व्यस्त हो रही जीवन सबकी,
भक्ति तो कर कभी अपने रब की।
आत्मा में ही तो तेरे ईश्वर है।
इम्तहान लेती जिंदगी बहुत,
काँटों में चलाती जिंदगी बहुत।
राहों में फूल भी तो आते नजर है।
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Bahut sundar Mama...👌👌👌
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