जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- संस्कार
विधा-मुक्त छंद
संस्कारों की पाठशाला में
पढ़ाये नहीं जाते उसूल।
बस देख कर ही सीखते हैं
संस्कृति के कीमती उसूल।
सीखने योग्य बातें कभी भी
सिखाई नहीं जाती है कभी।
देख सुन कर सीख जाते हैं,
कर्ण और एकलव्य जैसे सभी।
मर्यादित आचरण है संस्कार,
इससे ही मानव बनते महान।।
*मीरा आर्ची चौहान*
*कांकेर,छग*
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