कोरोना आगे
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कोरोना आगे कोरोना आगे
जिनगी म निराशा छागे।
हांसत खेलत मनखे मन के
मन म उदासी छागे।
कोरोना आगे कोरोना
जिनगी म निराशा छागे।
खेलत कूदत सबो लइका मन
कोरोना के ख़ातिर घर म धंधागे
कोरोना आगे कोरोना आगे
जिनगी म निराशा छागे।
नींद भर सुतत रही मनखे मन
जब ले ये कोरोना आईस
मनखे मन के नींद उड़ाने।
कोरोना आगे कोरोना आगे
जिनगी म निराशा छागे।
गाँव खोल हर सुना होगे
अउ सबो डाहर रूंधागे।
कोरोना आगे कोरोना
जिनगी म निराशा छागे।
कमाय खायेबर गयेरिहीन मनखे
कोरोना के डर म भागे ।
कोरोना आगे कोरोना आगे
जिनगी म निराशा छागे।
सबो के जिनगी म गरहन छागे
चारो मुड़ा हर धंधा गे।
कोरोना आगे कोरोना आगे
जिनगी म निराशा छागे।
सबो मनखे गुनत हावें
कब ये पापी कोरोनाभागे।
कोरोना आगे कोरोना आगे
जिनगी म निराशा छागे।
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