Friday, July 10, 2020

महासमुंद से भुवनेश्वरी सिदार "ज्योति" की रचना- कोरोना

भुवनेश्वरी सिदार"ज्योति"
कलमीदादर' पोस्ट नगौडी'
तहसील बसना जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

कोरोना आगे
          --------#-------
कोरोना आगे कोरोना आगे
जिनगी म निराशा छागे। 
     हांसत खेलत मनखे मन के
     मन म उदासी छागे। 
कोरोना आगे कोरोना 
जिनगी म निराशा छागे। 
      खेलत कूदत सबो लइका मन
   कोरोना के ख़ातिर घर म धंधागे
कोरोना आगे कोरोना आगे 
जिनगी म निराशा छागे। 
   नींद भर सुतत रही मनखे मन 
   जब ले ये कोरोना आईस
   मनखे मन के नींद उड़ाने। 
कोरोना आगे कोरोना आगे 
जिनगी म निराशा छागे। 
     गाँव खोल हर सुना होगे
     अउ सबो डाहर रूंधागे। 
कोरोना आगे कोरोना 
जिनगी म निराशा छागे। 
  कमाय खायेबर गयेरिहीन मनखे
   कोरोना के डर म भागे ।
कोरोना आगे कोरोना आगे 
जिनगी म निराशा छागे। 
   सबो के जिनगी म गरहन छागे
   चारो मुड़ा हर धंधा गे। 
कोरोना आगे कोरोना आगे 
जिनगी म निराशा छागे। 
    सबो मनखे गुनत हावें 
    कब ये पापी कोरोनाभागे।
कोरोना आगे कोरोना आगे 
जिनगी म निराशा छागे। 

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