लैलूंगा, जिला-रायगढ़
विधा-छंद मुक्त
कविता-कोरोना की मार और बेगारी का समस्या
शीर्षक- मार गई कोरोना
विश्व भर में जड़े फैलाती
अपनी अस्तित्व का एहसास कराती
आज काल बन छा गई कोरोना
चंद दिनों में ही जीवन का
स्वरूप बदलती एक नई
ज्ञान और दिशा दिखा
मजबूर कर गई कोरोना
रोजगार पर सब का खतरा है
हर जगह मातम पसरा है
मजदूर भटक रहे हैं राहों में
आसरा लिए हुए हैं पनाहों में
रोटी की जुगाड़ और काम की तलाश में
दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर
आज आफत बन मंडरा रही कोरोना
देश की अर्थव्यवस्था चरमराई है
आम जनता पर संकट छाई है
प्रकृति का प्रकोप भी भारी है
यह वै श्विक महामारी है
अपनो से अपनो को जुदा कर गई
राहों को भी सुनसान कर गई
बच्चों के चेहरे से मुस्कान छीन गई
मन्दिर-मस्जिद और पाठशालाओं
के दरवाजे बंद कर गई
भूखों मरते को और भूखा
मार गई महामारी कोरोना।
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