पता-दुर्ग(छ.ग.)
विधान-छंदमुक्त कविता
शीर्षक- *कोरोना संकट से बचाव*
बंद हो गये कल कारखाने,
विद्यालयों में लगे हैं ताले,
खो गई बाजारों की रौनक,
हर इंसान है सहमा-सहमा।
रोजी-रोटी छीन लिया,
इस कोरोना महामारी ने,
दौर आया है मंदी का,
कैसे इससे उबरा जाये?
शुरू करनी होगी सरकार को अब,
रोजगार मूलक कुछ योजनाएं,
देशहित में हमें भी कदम बढ़ाकर
मितव्ययी तो अब बनना होगा।
सहयोग भावना मन में लाकर,
विपत्ति से सबको लड़ना होगा,
अपने जरूरी काम निपटाकर,
घरों में सुरक्षित रहना होगा।
सावधानी,बचाव से है सबको रहना,
साफ-सुथरा रखें देश का हर कोना,
मिलजुलकर सब करें सहयोग,
देश होगा तभी कोरोनामुक्त ।।
व्याख्या- इस संकट के दौरान बहुत से मजदूरों का काम बंद हो गया,बहुत से लोग बेरोजगारी की मार झेल रहें है।उनके लिये सरकार को ऐसी योजनाएं लानी चाहिए जिससे उनकी समस्या दूर हो। तथा आम जनता के सहयोग से ही इस सूक्ष्म जीव को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है।
अनुरमा शुक्ला
दुर्ग(छ.ग.)
कोरोना के कारण उपजी पूरी समस्या और उसका समाधान बहुत खूब किया आपने
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