रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
स्थान- संबलपुर, जिला :- कांकेर
विषय :- संस्कार (छंदमुक्त)
~ " "~*संस्कार*~" " ~
संस्कारों की बातें
हो गई पुरानी,
भूल गए दादी,
नानी के किस्से,कहानी।
घर के बच्चे,
बूढ़े सब लगे है,
दुनियाँ बन गई
मोबाइल टी.वी.दीवानी।
संस्कार विहीन बच्चे,
नैतिकता में कच्चे।
जीवन बर्बाद कर रहे
बने हुए है अधकच्चे।
सुरम्य संस्कृति पर
राख पड़ गई,
विकृतियाँ मुँह बाएं
खड़ी हो गई।
विश्व गुरू का खिताब वाले,
देश के बच्चे
क्यों कर रहे मनमानी।
सद्गुणों को अपनाएं
भूले अभिमान,
बुरे विचारों को त्यागे
और बने महान।
अच्छे संस्कारों का
बहाएं रवानी,
साहस,विवेक, संयम है
संस्कार की निशानी।
संस्कारों की बातें
हो गई पुरानी,
भूल गए दादी,
नानी के किस्से,कहानी।
*व्याख्या* :- उपरोक्त कविता में संस्कारों की
कमी क्यों है बताई गई है।अच्छे संस्कार के
लिए सद्गुणों को अपनाने,बुरे विचारों को
त्यागने,साहस,विवेक,संयम ही इसकी निशानी है।
नलिनी बाजपेयी
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