कवियित्री-चंदा प्रहलादका
कलकत्ता
शीर्षक- जीने की समझ
विषय - रदीफ देता है
मात्रा भार -२४
जीवन ,ख़ुशी से जीने की समझ देता है ।
हँसने मुस्कुराने की भी वजह देता है ।
शिकवा शिकायतों को क्यूँ सजाके रखा है,
दिल में प्रीत का सागर ही बहा देता है ।
दीप उल्फ़त के पलक में जलाये रखा है ,
खोके धीरज उसे क्यों बुझा ही देता है।
खुद से नेह हो इतना कि बस सँभाले रखे ,
उन्माद मोह के वजूद ही खो देता है ।
सभी शख़्स को देखो नहीं संदेह से तुम,
अपनों को भी यूँ ग़ैर ही बना देता है ।
क्या बात जो दिलों में सभी के ज़िंदा रहो,
हर अधरों पे जो हँसी को सजा देता है ।
चले मिलके जमाने के साथ कदम यूँ ही,
लाखों में वो अपनी मिसाल ही देता है ।
स्वरचित
चंदा प्रहलादका
कलकत्ता
Saltlake city
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