Friday, July 24, 2020

कलकत्ता,पश्चिम बंगाल से कवयित्री चंदा प्रहलादका जी की कविता:- जीने की समझ

कवियित्री-चंदा प्रहलादका
कलकत्ता 
शीर्षक- जीने की समझ 
विषय - रदीफ   देता है 

मात्रा भार -२४
जीवन ,ख़ुशी से जीने की समझ देता है ।
हँसने   मुस्कुराने की   भी वजह देता है ।

शिकवा शिकायतों को क्यूँ सजाके रखा है,
दिल में   प्रीत  का  सागर  ही बहा देता है ।

दीप उल्फ़त के पलक में  जलाये रखा है ,
खोके  धीरज  उसे क्यों  बुझा ही देता है।

खुद से नेह हो इतना कि बस सँभाले रखे ,
उन्माद   मोह   के  वजूद  ही खो देता है ।

सभी शख़्स   को देखो नहीं संदेह से तुम,
अपनों  को भी  यूँ  ग़ैर  ही  बना  देता  है ।

क्या बात जो दिलों में  सभी के ज़िंदा रहो,
हर  अधरों पे  जो हँसी को सजा देता है ।

चले मिलके जमाने के साथ कदम यूँ ही,
लाखों में  वो अपनी मिसाल ही देता  है ।

स्वरचित 
चंदा प्रहलादका 
कलकत्ता 
Saltlake city
Kol-64

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