स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
शीर्षक -"मुंशी प्रेम चंद्र"
विधा- छंदमुक्त कविता
*********************
मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं
समाज का आईना दिखाएं
कहानी हो या उपन्यास
या मानसरोवर की शाखाएं ।
एक से बढ़कर एक कथाएं
जो समाज में मिल जाएं
मौलिकता भी ऐसी जो
जीवन को महका जाएं।
समाज की हर व्यथा को
कागज पर उतारा है
हर रचना की मार्मिकता ने
समाज को झकझोरा है।
पुष्पा की लेखनी में दम नहीं
इनके बारे कुछ लिखने की
ऐसे दुर्लभ कलमकार हैं
हमारे प्यारे मुंशी प्रेमचंद्र जी ।
nice lines
ReplyDeleteSuper di
ReplyDelete