स्थान - केशकाल
जिला- कोण्डागाँव (छ.ग.)
विधा - गीत
शीर्षक- शिव महिमा
नीलकंठ की लीला न्यारी,
त्रिभुवन स्वामी,हे त्रिपुरारी!...... 2
तुम सकल जगत का, पालन करते।
हे महादेव!हे शिव!औघड़दानी!
नीलकंठ की लीला न्यारी
त्रिभुवन स्वामी हे त्रिपुरारी!..... 2
चराचर में है,प्रभु वास तुम्हारा।
तुम बिन कौन यहाँ,हमारा सहारा।
नीलकंठ की,लीला न्यारी।
त्रिभुवन स्वामी,हे त्रिपुरारी!..... 2
डमडम डमरू,डमक के बाजे।
संग में डमरू के,सारे प्राणी नाचे।
नीलकंठ की, लीला न्यारी।
त्रिभुवन स्वामी,हे त्रिपुरारी..... 2
बेलपत्र चांवल में,खुश हो जाते।
एक पुकार में शिव,दौड़े दौड़े आते।
नीलकंठ की ,लीला न्यारी।
त्रिभुवन स्वामी हे त्रिपुरारी!....... 2
शिव के दम से,सूर्य तारे चलते।
लिखा भाग्य का,शिव ही बदलते।
नीलकंठ की ,लीला न्यारी
त्रिभुवन स्वामी हे त्रिपुरारी! .... 2
रश्मि विपिन अग्निहोत्री
केशकाल जिला कोण्डागाँव
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