Monday, July 6, 2020

कोण्डागांव से रश्मि विपिन अग्निहोत्री की रचना- शिव महिमा

रचनाकार - रश्मि विपिन अग्निहोत्री
   स्थान - केशकाल 
   जिला- कोण्डागाँव (छ.ग.) 
    विधा - गीत 
   शीर्षक- शिव महिमा

नीलकंठ की लीला न्यारी, 
त्रिभुवन स्वामी,हे त्रिपुरारी!...... 2

तुम सकल जगत का, पालन करते। 
हे महादेव!हे शिव!औघड़दानी! 

नीलकंठ की लीला न्यारी
त्रिभुवन स्वामी हे त्रिपुरारी!..... 2

चराचर में है,प्रभु वास तुम्हारा। 
तुम बिन कौन यहाँ,हमारा सहारा। 

नीलकंठ की,लीला न्यारी। 
त्रिभुवन स्वामी,हे त्रिपुरारी!..... 2

डमडम डमरू,डमक के बाजे। 
संग में डमरू के,सारे प्राणी नाचे। 

नीलकंठ की, लीला न्यारी। 
त्रिभुवन स्वामी,हे त्रिपुरारी..... 2

बेलपत्र चांवल में,खुश हो जाते। 
एक पुकार में शिव,दौड़े दौड़े आते। 

नीलकंठ की ,लीला न्यारी। 
त्रिभुवन स्वामी हे त्रिपुरारी!....... 2

शिव के दम से,सूर्य तारे चलते। 
लिखा भाग्य का,शिव ही बदलते।

नीलकंठ की ,लीला न्यारी
त्रिभुवन स्वामी हे त्रिपुरारी! .... 2

       रश्मि विपिन अग्निहोत्री
      केशकाल जिला कोण्डागाँव

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