Monday, July 6, 2020

रायगढ़ से गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न" की रचना- सावन

रचनाकार-गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"
जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विधा-छंद मुक्त
विषय-सावन का मौसम
शीर्षक- "मदमस्त-महकता सावन आया है"
*************************
हरीतिमा संग महकता मदमस्त-सावन आया है,
धरा की प्यास बुझाने को भर-भर प्रेम लाया है ।
नन्ही-नन्ही घासों की क्यारियां सजने लगीं,
दर्दूर और झींगुर की धुन मन को बहुत हर्षाया है ।।
कैसा मदमस्त महकता सावन आया है.........
**************************
धुले सूखे-साखों से कैसे वृक्ष की सुंदर काया है,
हरा-भरा दिखे जहां ने, नवल-नवीन हरापन पाया है ।
फूलों पर मंडराने लगे हैं मधुप,
कल-कल स्वर में झरना भी तो झर-झराया है ।।
कैसा मदमस्त महकता सावन आया है.........
**************************
कॉंपते अधरों से देखो पिय-पिया संग शरमाया है,
काले-काले बादल तड़क-भड़क से पास ही मंडराया है ।
प्रेम-प्यास निरंतर बढ़ता ही जाए,
सुंदरी वसुधा को निहारता मयंक मंद-मंद मुस्कुराया है ।।
कैसा मदमस्त महकता सावन आया है.........
**************************
प्यासी-प्यासी भूमि की प्यास बुझने लगी ,
सोंधी-सोंधी खुशबू लिए समीर भी तो सर-सराया है ।
काश-पलाश के पुष्प मन-मोहने लगे हैं,
इसे धरती कहूॅं या स्वर्ग देख मन भरमाया है ।।
कैसा मदमस्त महकता सावन आया है.........
**************************
झूमते लताओं ने पेड़ों संग रिश्ता निभाया है,
हल धरा हलधर धरा से स्वेद-बीज ही उपजाया है ।
अधखिले कलियों संग कोमल-कोमल पत्ते भी,
जब-जब बहे वात-लहर कहते हैं फसल लहलहाया है ।।
कैसा मदमस्त महकता सावन आया है.........
**************************
उपजाऊ जमीं सा जीवन कहो क्या-क्या यहॉं कमाया है?
माया-मोह से बंधा मनुज कौन तुम्हें उकसाया है?
सुख-दुख हैं दो बैल इसे सदा संभाले रखना,
आखिर गुरुर-अभिमान के खेत को धीरज ही तो जुताया है ।।
कैसा मदमस्त महकता सावन आया है.........
**************************
दो पल की है जिंदगी तुमने क्या खोया और क्या पाया है?
दिवाकर अस्त होगा अस्ताचल में फिर रात अंधेरी साया है ।
जीव हो तो जीवित-जीवंत रहो,
ध्यान रहे कालचक्र का काल ही तुम्हें आजमाया है ।।
कैसा मदमस्त महकता सावन आया है.........
मदमस्त महकता सावन आया है.........

************************
गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"

7 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...