Monday, July 6, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- सावन

कवयित्री-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर (छग)
शीर्षक-सावन

उमड़-घुमड़ कर काले बादल,
आ गये अब अलसाते बादल।

तृप्त हुई देखो वो वसुधा रानी,
बरस पड़ा अब सावन में पानी।

सूखे खेत अब दिखते लहलहाते,
छाता,खुमरी सबके मन को भाते।

तीतुर दादुर राग मल्हार है गाते,
सावन के झूले सबको रिझाते।

विरह गीत प्रियतम तुम्हें बुलाते,
पावस गीत अब हमें हैं तरसाते।

जुगनू के टिमटिम विरह बढ़ाते,
दुशाला ओढ़े भुट्टे हमें ललचाते।

सावन शिव- अभिषेक कर जाता,
खेत- खलिहानों को  है हर्षाता।

धरती का भगवान तृप्त हो जाता,
सावन सब अधरों पर मुस्कुराता।।


मीरा आर्ची चौहान
कांकेर ( छग)

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