कवयित्री-अर्चना पाठक
पता-अम्बिकापुर,सरगुजा छत्तीसगढ़
शीर्षक- भारतीय पुलिस
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दुविधा में अब देश है, किसका करें प्रबोधl
कहती है यह अर्चना, कीजे नित्य प्रशोधll
छुट्टी सबको चाहिए, नहीं कर्म का बोधl
पुलिस यहाँ करती फिरे, भाँति भाँति के शोधll
देशबोध के प्रेम से, सदा बढ़ाते मानl
इनके बल से देश है, बढ़ती जाए शानll
कोरोना के दौर में, रात दिवस का कामl
पुलिस यहाँ खटती रहे, तब हो उसका नामl।
शिव की कर लो अर्चना, तब ही हो उद्धारl
कहती है अब अर्चना, देंगे प्रभु उपहारll
अर्चना पाठक
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