Friday, July 17, 2020

ये दौर भी कट जायेगा और फिर मुस्कुरायेंगे हम - पुखराज प्राज



 होमो सेपियन्स यानी आधुनिक मानव स्तनपायी सर्वाहारी प्रधान जंतुओं की एक जाति, जो बात करने, अमूर्त्त सोचने, ऊर्ध्व चलने तथा परिश्रम के साधन बनाने योग्य है। पृथ्वी में विकसित लाखों वर्ष पूर्व माना जाता है। संपूर्ण मानव विकास मस्तिष्क की वृद्धि पर ही केंद्रित है। यद्यपि मस्तिष्क की वृद्धि स्तनी वर्ग के अन्य बहुत से जंतुसमूहों में भी हुई, तथापि कुछ अज्ञात कारणों से यह वृद्धि प्राइमेटों में सबसे अधिक हुई। संभवत: उनका वृक्षीय जीवन मस्तिष्क की वृद्धि के अन्य कारणों में से एक हो सकता है। हम चर्चा कर रहे हैं मानवों के मष्तिक एवं मनोबल के संदर्भ में, जिसमें हम मनुष्य के अथक परिश्रम एवं सिखने की कला से आदिम मानवों के सफर से लेकर आधुनिक मानवों के शिखर तक मनुष्य में प्रवीणता जुड़ते रहे या वर्तमान की भाषा में कहें तो हम अपडेट होते रहे। मानवों के जीवन काल में कई बाधाएं आई और गई। 

          वर्तमान दौर भी कुछ बाधाओं के साथ चलायमान है। विश्व में कोरोना महामारी जिसे कोविड19 भी कहा जाता है। वर्तमान में पूरी दुनियाँ इसके चपेट में है। किसी भी राष्ट्र की बात करें तो वहां की सरकार या प्रशासन व्यवस्थापिका सिर्फ और सिर्फ आप ने जनों के संरक्षण और कोविड19 से बचाव के लिए प्रयासरत है। वर्तमान समय में कई कम्पनियां, प्राईवेट सेक्टर एवं दफ्तरों में ताले लगे हुए है, वहीं आर्थिक मंदी भी हावी है। संभव है लाखों लोगों की नौकरियां भी गई हों। यह भी संभव है कि लोग वर्तमान दौर से जूझते हुए बहुत ज्यादा दिक्कतों का सामना कर रहें हों। लॉक्डाऊन फिर अनलॉक 1-2 के दौर में फिर से कोरोना अपने पैर पसारने को आमादा है। यह दौर माना की बेहद कठीन है मगर मैं आपको इस आलेख के प्रारंभ के कथनों में हमनें देखा था कि मानवों के विकास की प्राथमिक कुंजी मस्तिष्क ही रहा है। वर्तमान दौर में हम कई प्रकार से परेशान है- पहला आर्थिक, दूसरा शारिरिक, तीसरा मनोवैज्ञानिक और चतुर्थ स्वस्थ जीवन के लिए संघर्ष जारी रखे हुए है। हम बात कर रहे थे कि मानव जो आदिम से विकसित के दर्जे पर पहुचना मस्तिष्क का ही मुख्यकार्य रहा है। 

     वर्तमान दौर पर हमें मनोवैज्ञानिक रूप में सबल होना आवश्यक है। हम वहीं है जिसने साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जायेगा, मिलकर बोझ उठाना जैसे वाक्यों के गीतों से मनोबल को दोगुना किया। हम वही है जो संसार में एकता और अखण्डता के लिए परस्पर एक दूसरे के सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं। हम वहीं है जो आपदाओं के समय एक दूसरे के हमदर्द होते हैं। हम वहीं हैं जो भूख में भी रोटी बाटकर खाने की नौबत में भी हर्ष और उत्सव के पल ढूंढ़ लेते है। यानी हमारा मनोबल ही हमें बेहतर और बेहतर और उससे भी बेहतर करने की प्रेरणा देता है। वर्तमान दौर भी कुछ ऐसे ही फाईट-बैक का है। हम कई महामारियों से लड़े हैं, कोरोना से भी जंग जरूर जीतेंगे हम और मुस्कुरायेंगे हम। सभी का परस्पर सहयोग की भावना और अनिवार्य सोशल डिस्टेंस तथा मास्क का उपयोग करते चलें। कोरोना से जंग अवश्य जीतेंगे।

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