Wednesday, July 29, 2020

महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- चिन्हारु

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला:- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- छत्तीसगढ़ के चिन्हारु

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सुनो जी गोलू, सुनो जी भोलू,
सुनो जी भैया समारु।
किसम किसम के रोटी पीठा,
हवय छत्तीसगढ़ के चिन्हारु।

हर तिज तिहार के आपन,
होथे अलग अलग मिठाई।
संग म हवय छत्तीसगढ़ म,
नमकीन अउ खटाई।

हरेली के तिहार म बनथे,
चऊर के गुरहा चिला।
पीतर तीज म बारा भजियां,
संग रईथे चटनी रसीला।

पूस पुन्नी म घर घर छनथे,
ऐरसा, पूरी मिठाई।
होली म गुझिया बनाथे,
घर घर म भवजाई।

आबे गोलू, आबे जी भोलू,
आबे जी भैया समारु।
किसम किसम के रोटी खिलाहूं,
छत्तीसगढ़ के चिन्हारु।

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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक धरोहर यहां के विभिन्न पकवानों को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है।

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