जिला:- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- छत्तीसगढ़ के चिन्हारु
#######################
सुनो जी गोलू, सुनो जी भोलू,
सुनो जी भैया समारु।
किसम किसम के रोटी पीठा,
हवय छत्तीसगढ़ के चिन्हारु।
हर तिज तिहार के आपन,
होथे अलग अलग मिठाई।
संग म हवय छत्तीसगढ़ म,
नमकीन अउ खटाई।
हरेली के तिहार म बनथे,
चऊर के गुरहा चिला।
पीतर तीज म बारा भजियां,
संग रईथे चटनी रसीला।
पूस पुन्नी म घर घर छनथे,
ऐरसा, पूरी मिठाई।
होली म गुझिया बनाथे,
घर घर म भवजाई।
आबे गोलू, आबे जी भोलू,
आबे जी भैया समारु।
किसम किसम के रोटी खिलाहूं,
छत्तीसगढ़ के चिन्हारु।
#######################
व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक धरोहर यहां के विभिन्न पकवानों को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है।
No comments:
Post a Comment