कवियत्री -प्रीति चौधरी "मनोरमा"
पता ग्राम +पोस्ट -लाड़पुर
जिला -बुलन्दशहर
शीर्षक -नव प्रभात
अहा! कितनी मनभावन है नवप्रभात की लाली,
स्वर्णिम रश्मियों से धरा हो रही है अति उजियाली।
अनुपम प्रतीत हो रहा है रक्तिम प्रभाकर,
ज्यों उदित हुआ हो कंचन-जल में नहाकर,
कण-कण मुदित है प्रातः का सानिध्य पाकर,
सुगंधित पवन बह रही है मतवाली।
अहा ! कितनी मनभावन है नवप्रभात की लाली।
तरुओं ने पहन लिए नव कोंपलों के हार,
प्रकृति ने किया है अलौकिक श्रृंगार,
रवि किरणों ने किया है अद्भुद विस्तार,
आम्र तरु में छुपकर कूहके कोकिला काली,
अहा!कितनी मनभावन है नवप्रभात की लाली।
मंत्रमुग्ध करता है पंछियों का मधुर कलरव,
संगीतमय हुआ निनाद से वातावरण नीरव,
आलस्य तजकर श्रेष्ठ कर्म कर तू मानव,
सज रही भोर के नमन को उर की थाली,
अहा !कितनी मनभावन है नवप्रभात की लाली।
प्रीति चौधरी "मनोरमा"
जनपद बुलन्दशहर
No comments:
Post a Comment