Friday, July 3, 2020

रायगढ़ से मोनालिसा बेहरा कृत आलेख:- शिक्षा :एक परिदृश्य

रचियता-मोनालिसा बेहरा
लैलूंगा,जिला- रायगढ़
विधा-आलेख लेखन

                       शिक्षा-वर्तमान परिदृश्य

शिक्षा का अर्थ होता है असत्य से सत्य की ओर,अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर। पर क्या हमारे देश
की शिक्षा का जो वर्तमान परिदृश्य है उसमें ये संभव है?
                        प्राचीन काल मे गुरुकुल शिक्षा पद्धति थी
जिसमें विद्यार्थी अपना घर छोड़ वन में जाकर गुरु के आश्रम
रहकर शिक्षा ग्रहण करते थे। वहां कोई भेदभाव नही था सबके
लिए एक समान नियम था।परन्तु समय के साथ इसमे परिवर्तन
होता गया और आज जिसके पास पैसा है वह निजी स्कूलों में
अपने बच्चे को पढ़ाते हैं और बाकी सब स्कूल अपने बच्चे को मध्यान्ह भोजन के लालच में भेजते हैं। आज आजादी के इतने
सालों बाद भी हम अंग्रेजी शिक्षा पद्धति को अपना रहे हैं जो
मैकाले की पद्धति थी जिसमें भारतीयों को निम्न पदों में नोकरी
देने के लिए दी जाती थी। हमे इस मानसिक गुलामी से बाहर
आना होगा जिसमें अंग्रेजी बोलने वालों को शिक्षित और हिंदी
बोलने वालों को अशिक्षित माना जाता है।
                              वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा एक व्यवसाय
बन चुका है ।शैक्षणिक संस्थान अपने जेबें भरने में लगी हैं ,शिक्षा से उन्हें कोई वास्ता नही होता।माता- पिता की अपेक्षाएं भी अपने बच्चों से बहुत ज्यादा होने के कारण वे उनपर अनावश्यक 
दबाव बनाते हैं जिससे अगर बच्चे उनके अपेक्षा ओं पर खरे
उतरते हैं तब तो कुछ नही ,नहीं तो बच्चे आत्महत्या तक कर
लेते हैं ।
           अब कोरोना काल मे शिक्षा तकनीकी पर आधारित हो चुकी है जिसके लाभ कम और नुकसान ज्यादा है। बच्चे मोबाइल फोन पर पढ़ने को मजबूर हो गए हैं आज विद्यार्थी कम पढ़ता है
और शिक्षक अधिक । जो स्कूलों में खेल- खेल में बच्चे सीखते
थे अब वो भी नही हो रहा और उनमें ऑनलाइन  कक्षा को लेकर उदासीनता ही देखी जा रही है।बच्चो के सीखने की उम्र 6 साल से होती है पर अब 3 साल के बच्चे को ही पढ़ने के लिए दबाव
बनाया जा रहा है जिस कारण उनका बचपन उनसे छीना जा रहा है।आंगनवाड़ी में बच्चे के 9 माह की गर्भावस्था से लेकर 6साल
तक कि शिक्षा  प्रारम्भिक बाल्यावस्था और देख-रेख शिक्षा पद्धति पर आधारित है जिसमें बच्चा खेल -खेल में सिखता है।
और यही सही भी है।
    हमे शिक्षा के वर्तमान परिदृश्य में बहुत परिवर्तन की आवश्यकता है जिससे शिक्षा का सही अर्थ लोग समझ सकें।

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