जिला बेमेतरा छ ग
विधा संस्मरण
शीर्षक गांधी जयंती
बात सन 2008की है, जब पहली बार हम दोनों दो से तीन होने वाले थे। अर्थात् माता पिता बनने वाले थे। मन में उन दिनों बहुत उत्सुकता, बेचैनी, आशंका रहती थी, क्योंकि हम दोनों नौकरी पेशा थे, और परिवार से दूर थे। पर अंत के महीनों में हम अपने परिवार के पास आ गए थे तो परिवार का पूरा सहयोग मिला और घबराहट थोड़ी कम हुई।
डेट लास्ट वीक सितम्बर का मिला था।30/09 को पारिवारिक डॉक्टर से चेकअप कराने पर उन्होंने तुरन्त हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी।30/09की रात्रि 8:००बजे विनीता को सेक्टर 9 हॉस्पिटल में एडमिट किए। वहां के डॉक्टर एवम् सिस्टर ने भी पूरा सहयोग किया। रात बीत गई 01/10को भी डॉक्टर ने दोपहर तक वेट किया पर उन्हें लेबर पेन नहीं आया। दोपहर में विनू को लेबर रूम ले जाया गया। वहां अंदर और किसी को जाने की अनुमति नहीं थी। हम (मां, और मै) बाहर बैठ कर इंतज़ार करने लगे। मन में तरह तरह के विचार आने लगे।
शाम को सिस्टर द्वारा बताया गया कि विनु को इंजेक्शन लगाने से भी लेबर पेन नहीं आ रहा है यही स्थिति रही तो ऑपरेशन करना पड़ सकता है।
हम और परेशान हो गए क्योंकि ऐसी स्थिति हमारे सामने पहली बार आ रही थी। हम परिचित के लोगों से संपर्क करने लगे, तो थोड़ी राहत मिली पर सुकून अभी भी नहीं था।
01/10 को रात्रि 8:30 के लगभग मेरा नाम पुकारा गया। मै उत्सुकता एवम् घबराहट के साथ गया डॉक्टर ने मुझे अच्छे से स्थिति के बारे में समझाया और एक पेपर पर हस्ताक्षर लिए।
अब धड़कन और बढ़ गई क्योंकि ऑपरेशन होना तय हो गया। आंखों से नींद गायब थी बस नज़रें व कान लेबर रूम की और लगी हुई थी, और मन में तरह तरह के विचार चल रहे थे। कभी लेबर रूम का दरवाजा खुलता या आवाज आती मै खड़ा हो जाता पर मेरा नाम 1:15a m में पुकारा गया मै घबराहट के साथ गया डॉक्टर ने मुझे बधाई दिया और कहा लड़का हुआ है और दोनों सुरक्षित है पर थोड़ा इंतजार करना होगा उन्हें देखने के लिए। करीब आधे घण्टे के इंतजार के बाद बेटे को दिखाने लाया गया। लाल लाल होठ चेहरा लंबे बाल मै उसे देखता ही रह गया यकीन नहीं हो पा रहा था कि मै पापा बन गया।
अब वीनू को देखने की इच्छा थी पर उसमें अभी वक्त था इंतजार करते करते रात बीत गई सुबह 8:30a m के लगभग वीनू को वार्ड में शिफ्ट किया गया। उसे देखकर बात कर ठीक लगा पर वह तकलीफ में थी पर मां बनने की खुशी के सामने वह तकलीफ कुछ भी नहीं थी। उस समय मेरे पास की पैड नोकिया मोबाइल था उससे सभी को मैसेज किया"हमारे घर गांधी जी आए हैं"
सूर्य प्रकाश पाटिल
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