Monday, July 6, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- सावन

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   विधा - छंदमुक्त कविता ( छत्तीसगढ़ी रचना ) 
   शीर्षक  -  " सावन महीना के महिमा "

भाव - रचनाकार द्वारा प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम सावन मास की महिमा का बखान किया है। 
---------------------------------

आगे अब सावन सम्मारी ।
मनाबो भोले भंडारी ।।

बेल पतिया चढ़ाबो, अऊ चढ़ाबो धतूरा। 
गांजा भांग के भोग बिना, पूजा हावय अधूरा।। 
तोर महिमा अब्बड़ भारी।
भोले बाबा त्रिशूलधारी ।।

कुंवारी नोनी मन तोर पूजा करथे,
सुघ्घर वर ल पाय बर।
उपास रइथे, मन म सुमरन करथे,
पनही घलो नइ पहनय, बोल बम जाय बर।। 
अऊ हाथ म पूजा के थारी। 
भोले बाबा मोर डमरूधारी।।

करही सब्बो के मनौती पूरा, 
अब्बड़ दयालु मोर भोला हे। 
सावनी रमायन के जोखा माढ़े हे,
नेवता दीदी तोला हे।। 
सुने बर आहू, सब्बो संगी संगवारी।
निपटा के काम दुनियादारी।। 

नांगर तिहार के दिन नांगर के पूजा होथे,
नांग पंचमी म नंगमत कराथे । 
ढूरमांदर बनके कोला बारी म, 
खीरा चोराय बर ओमन जाथे।
लइका मन के सुनावत हे किलकारी ।
नांग पंचमी के महिमा अब्बड़ भारी।। 

प्रेम प्रीत के घलो महीना हे सावन,
चारों मुड़ा हरियाली छा जाथे।  
नावा नावा रूप प्रकृति के दिखथे,
कोमल कलि ह नवजीवन पाथे।। 
मुस्कुरात हे मोर प्रकृति महतारी।
पहने हे जैसे हरियर सारी।।

--------******---------

2 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...