Tuesday, July 7, 2020

बलौदाबाजार से पुनीत राम सूर्यवंशी की रचना- थरहा

रचनाकार-पुनीत राम सूर्यवंशी
जिला-बलौदाबाजार(छ.ग)
 विषय-कृषि पर केन्द्रित रचना
शीर्षक-सुनता सुमत के थरहा
विधा-छंद मुक्त
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दाई ओ, ददा गा, भईया गा,
बहिनी ओ, बनिहार मन गा,
सुनता सुमत के थरहा तुमन डार देहुं।।1।। 

सब्बो झन जुरमिल के कमाहुं खाहुं,
अपन मन के जांगर टोर मिहनत ले,
बईर भाव के निंदा बंद ल टार देहुं।।2।।

धरती दाई के सुघ्घर काया ल,
दया-मया के खातु छिंड़क के,
हरिहर रुख राई ले सिंगार देहुं।।3।।

जांगर टोर खुन पछिना ले,
धरती महतारी के कोरा ल,
धान चऊर राहेर ले भर देहुं।।4।।

भारत माँ के मुड़ म आय बिपत ल, 
दूर करे बर अपन मन के बेटा ल,
बैरी मन ल मार भगाय बर भेज देहुं।।5।।

व्याख्या-हमर छत्तीसगढ़ म अभी के बेरा म खेती किसानी करे के अड़बड बिक्कट भरदाराय हेवय। कोनो लयहरा बोंवत हेवय त कोनो रोपा लगावत हेवय। ए रचना म दाई-ददा, भाई-बहन अऊ जम्मो बनिहार मन ल सुनता सुमत ले रहय म इ आरा करे हेवय। अऊ देश म बिपत आय ले अपन बेटा ल घलो बइरी मन ल खदेड़ भगाय म भेज देना चाही।

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