जिला -कोरबा छत्तीसगढ़
विधा - कविता
शीर्षक " किसान "
ऐ झिलमिल करते फलक की चाँदनी
तूम मेरे बच्चों के लिए
लाना नींद सुहानी ।
ठंडी बयार के झोंके लाना ,
झींगुर के तुम गीत गाना ।
ये दिवस दिवा के थके हुए हैं,
श्रम बूँदों के भीगे हुए हैं,
इनके ही बाहुबल से
लहराती है फसल सुहानी ।
कहे माँ भारती ,
कहे माँ धरती ,
इनके ललाट बल को मिटाना ; देना नींद सुहानी ।
ऐ मेरे खलिहानों के वीरों!
अभी सो जाओ तुम नींद सुहानी,
अब आई रात सुहानी
लेकर फलक में चाँदनी ।
ब्याख्या--रचनाकार खेत में श्रम करने वाले किसानों को सुकून और आराम देने के लिए प्रकृति से आग्रह कर रही है ।
गोमती सिंह
कोरबा छत्तीसगढ़
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