Tuesday, July 28, 2020

बारपेटा,आसाम से कवि पंकज मिश्र'अटल' जी की कविता-अभी भी समय है

नाम- पंकज मिश्र ' अटल '
बरपेटा, आसाम
रचना का शीर्षक-  "अभी भी है समय"

"अभी भी हैै समय "
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आओ इन्हें भी सुनें
क्योंंकि कम है समय
और हो न जाए देर कहीं
ओढ़ ले चादर 
आकाश की यह दुनिया
और हम
करते ही रह जाएं संवाद
सिमट जाएं आवाजें
उतर आए नदी ओस की
आंखों से गालों तक और 
भीग जाए फिर से एक कविता
बहुत सारे सवालों में
डूब जाए इंसानियत
और हम बस करते रहें स्याह
पन्नों को
मैं कहता हूं, कि
हमारे सोचने से पहले ही कहीं
डूब न जाए एक पहाड़ी नदी
मन की घाटियों में
क्योंंकि बचा है
बहुत कम समय
और तराश रही है रात
अपने तरीके से
नए अंदाज़ में 
और हम हैं कि कर रहे हैं इंतेज़ार
करना होगा 
संवाद समय रहते हुए
घुप्प अंधेरे में 
फैलती स्याही से
कुछ सवाल भी
रहना होगा सावधान
नुकीलेपन से हवाओं के
और दृष्टियों से दिशाओं की
समय रहते हुए
क्योंंकि अभी है समय
बना रही है आर्ट नन्ही बच्ची
भर रही है रंग
जा रहे हैं जो फैलते
उकेर रही है
मुस्कानें कैनवास पर
जल्दी करो
टांक दो
अंधेरे के पसरने से पहले ही
क्योंंकि अभी समय है
और चिंता है मुझे
कि हो न जाए देर कहीं
क्योंंकि समय कम तो है
लेकिन अभी भी है समय।
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@ पंकज मिश्र ' अटल '
जवाहर नवोदय विद्यालय, सरभोग, बरपेटा, आसाम

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